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टाटा समूह में छिड़ा घमासान

New Delhi, Feb 19 (ANI): Tata Group Chairman N. Chandrasekaran speaks during the Opening Ceremony of India AI Impact Summit 2026 at Bharat Mandapam, in New Delhi on Thursday. (DD News/ANI Video Grab)

मुंबई। देश के सबसे बड़े उद्योग समूहों में से एक टाटा समूह में घमासान छिड़ गया है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को ऐलान किया कि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन पांच साल और पद पर रहेंगे। बोर्ड ने उनका कार्यकाल 2032 तक बढ़ा दिया। इसके तुरंत बाद टाटा समूह के प्रमुख नोएल टाटा ने फैसले को गैरकानूनी बताया। असल में टाटा संस लिमिटेड को बोर्ड ने एक वोटिंग के जरिए 4-1 से चंद्रशेखर के पक्ष में फैसला किया और उनको चेयरमैन बनाए रखने की ऐलान कर दिया। गौरतलब है कि उन्होंने अगस्त में चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था।

अब बोर्ड के फैसले को लेकर घमासान छिड़ा है। नोएल टाटा ने उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने को गैरकानूनी करार दिया है। नोएल टाटा ने कहा है कि उन्होंने चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाए रखने के खिलाफ वोट किया था। उनका वोट बोर्ड के अंदर वीटो की हैसियत रखता है। इसका अर्थ है कि बाकी लोग कुछ भी कहें अंतिम फैसला नोएल टाटा माना जाएगा। उनका कहना है कि एक गलत कानूनी राय के आधार पर उनके वीटो को खारिज कर दिया गया।

जानकार सूत्रों का कहना है कि यह विवाद आगे बढ़ने वाला है। बताया जा रहा  है कि टाटा समूह की आम सभा यानी एजीएम की बैठक में नोएल टाटा चेयरमैन पद से चंद्रशेखरन को हटाने का प्रयास करेंगे। गौरतलब है कि टाटा संस की सालाना बैठक पिछले दिनों टाल दी गई थी। लेकिन 31 दिसंबर से पहले यह बैठक करानी होगी। उसमें चंद्रशेखरन को हटाने का प्रयास हो सकता है।

बहरहाल, इससे पहले बोर्ड ने गुरुवार को चंद्रशेखर के तीसरे कार्यकाल की मंजूरी दी। इसके साथ ही कंपनी को शेयर मार्केट में उतारने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ध्यान रहे अभी चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, वे फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले थे। उससे पहले उन्होंने 12 अगस्त 2026 को इस्तीफा दे दिया था। कहा गया था कि नोएल टाटा से मतभेद और ट्रस्ट में खींचतान की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है। अब उनको तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है तो उसकी मंजूरी एजीएम में लेनी होगी। उसमें टाटा ट्रस्ट की हिस्सेदारी 66 फीसदी है। वहां पर नोएल टाटा चंद्रशेखरन की नियुक्ति को रोक सकते हैं।

अगर चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की नियुक्ति मिलती है तो टाटा ग्रुप में पहली बार कोई ग्रुप एग्जीक्यूटिव 65 साल की तय रिटायरमेंट उम्र के बाद भी पद पर बना रहेगा। टाटा ग्रुप की नीति के मुताबिक एग्जीक्यूटिव आमतौर पर 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं। हालांकि, नॉन एग्जीक्यूटिव पद पर वे 70 साल तक रह सकते हैं। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं। उनका नया कार्यकाल फरवरी 2027 से शुरू होगा और 2032 में खत्म होगा। गौरतलब है कि चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया।

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