नई दिल्ली। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों की दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली के समानांतर रविवार, एक नवंबर को भारतीय जनता पार्टी ने राजधानी दिल्ली सहित देश के कई शहरों में लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाला। भाजपा ने इसे ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च का का नाम दिया है। बुधवार, 28 अक्टूबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली में ऐसा ही मार्च किया था। भाजपा ने 2024 के चुनावों को लेकर कांग्रेस के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, ‘राहुल कहते हैं कि 2024 का चुनाव अवैध था। मैं कहना चाहता हूं कि 2024 में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बनकर आए’। उन्होंने राहुल को इंगित करते हुए कहा, ‘अगर 2024 का चुनाव अवैध था तो आप भी अवैध लीडर ऑफ अपोजिशन हैं’। रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों के जुटने के दावे पर संबित पात्रा ने सवाल उठाए। उन्होंने रैली की तस्वीरें और वीडियो दिखाते हुए कहा कि मैदान में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली थीं।
भाजपा आरोप लगा रही है कि कांग्रेस ने जान बूझकर एक नवंबर का दिन चुना, जिस दिन दिल्ली में सिखों का नरसंहार हुआ था। इसे मुद्दा बना कर भाजपा ने दिल्ली में हरि नगर से तिलक नगर तक करीब एक किलोमीटर लंबा मार्च निकाला गया। इसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार और सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरियाणा के रोहतक में रैली निकाली। उन्होंने कहा कि वोट चोरी कांग्रेस की विरासत है। ये वोट चोरी भी करते हैं और जनता के वोट का अपमान भी करते हैं। राहुल गांधी विदेशी ताकतों की टूलकिट बनकर काम कर रहे हैं। केद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि आज सिख विरोधी हिंसा के पीड़ितों को याद करना चाहिए था लेकिन राहुल गांधी उन्हें भूलकर रामलीला मैदान में अपनी राजनीति चमका रहे हैं।
