मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी सीखना अनिवार्य किए जाने का मामला अब हाई कोर्ट में पहुंच गया है। राज्य सरकार के इस निर्देश के खिलाफ ऑटो, टैक्सी ड्राइवरों ने हड़ताल का ऐलान किया है। इस बीच मंगलवार को चार ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा, टैक्सी और एप बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना जरूरी कर दिया है। इसके लिए टेस्ट लिया जा रहा है और लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी जा रही है।
इसके खिलाफ दायर याचिका में ड्राइवरों ने कहा है कि सरकार का कानून नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। वकील विवेक शुक्ला के जरिए दायर जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि 12 अगस्त का सरकारी नोटिफिकेशन लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवरों की आजीविका के लिए खतरा है। यह याचिका मोहम्मद कासिम अहमद, मोहम्मद तौसीफ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान ने दायर की है।
इसमें दावा किया गया है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार, अनुच्छेद 19 यानी व्यापार और पेशे की आजादी) के अधिकार और अनुच्छेद 21 यानी जीवन के अधिकार के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह भी कहा गया है कि यह आदेश मोटर वाहन अधिनियम के भी खिलाफ है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की शर्त नहीं रखी गई है। इस याचिका पर गुरुवार को तत्काल राहत के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने सुनवाई होने की संभावना है।
