कोलकाता। पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अन्य पिछड़ी जातियों की आरक्षण की व्यवस्था को बदल दिया है। सरकार ने ओबीसी आरक्षण की दो श्रेणियों में से 10 फीसदी आरक्षण की एक श्रेणी को खत्म कर दिया है। इस तरह उस श्रेणी में शामिल ज्यादातर जातियां आरक्षण के दायरे से बाहर हो गई हैं। उसमें 70 से ज्यादा जातियां मुस्लिम समाज की थीं। ममता बनर्जी ने 2011 में सत्ता में आने के बाद एक अन्य श्रेणी बना कर 75 जातियों को उसमें शामिल किया था, जिसमें 71 जातियां मुस्लिम समाज की थीं। अब इनको आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
आरक्षण की 10 फीसदी वाली श्रेणी खत्म होने के बाद अब राज्य में ओबीसी आरक्षण घट कर सात फीसदी रह गया है। सात फीसदी वाली श्रेणी में सिर्फ 66 जातियां ओबीसी आरक्षण के दायरे में रहेंगी। धर्म आधारित वर्गीकरण की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह फैसला कलकत्ता हाई कोर्ट के 2024 के आदेश के आधार पर लिया गया है। हाई कोर्ट ने ओबीसी सूची में 77 अतिरिक्त जातियों को जोड़ने की प्रक्रिया को अवैध और असंवैधानिक बताया था।
ममता बनर्जी की सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन अब राज्य सरकार इस याचिका को वापस ले रही है। बहरहाल, 2010 से पहले वाली ओबीसी श्रेणी में शामिल जातियों का दर्जा बना रहेगा। इस कोटे के जरिए पहले नौकरी पा चुके लोगों की नियुक्तियों पर भी असर नहीं पड़ेगा। असल में ममता सरकार ने ओबीसी आरक्षण को दो श्रेणियों में बांट कर ओबीसी-ए को 10 फीसदी और ओबीसी-बी को सात फीसदी आरक्षण दिया था।
