नई दिल्ली। अगले साल से छठी कक्षा में तीन भाषा का फॉर्मूला लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। सर्वोच्च अदालत ने छात्रों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा है कि अगले साल छठी कक्षा में इस नियम को नहीं लागू किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस साल जो बच्चे छठी क्लास में हैं उनको तीसरी भाषा के नाम पर पास या फेल नहीं कराया जाएगा। उनको सिर्फ अपीयरेंस सर्टिफिकेट दिया जाए।
गौरतलब है कि पहले केंद्र सरकार ने छठी कक्षा को छूट देने से इनकार किया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने यह छूट दे दी है। सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा के छात्रों को पहले ही यह राहत दी जा चुकी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छठी कक्षा के छात्रों को अचानक भाषा बदलने से परेशानी हो सकती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने यह आदेश दिया।
असल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के त्रिभाषा फॉर्मूले को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इन पर सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस साल से छठी कक्षा के छात्रों को छूट देने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमने इस पर विस्तार से चर्चा की है। हम इस साल से छठी कक्षा को छूट देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें इसी साल से इसे पढ़ना चाहिए’। केंद्र ने बताया कि करीब 28 सौस्कूलों के आंकड़ों के अनुसार, केवल 1.2 फीसदी स्कूल प्रभावित हुए हैं। सरकार के मुताबिक करीब 99 फीसदी स्कूलों ने तीसरी भाषा की नीति अपनाई है और उन्हें जरूरी सुविधाएं दी गई हैं।
