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सनातन धर्म का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली। तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को बीमारी बताने और इसे खत्म करने का बयान दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। देश की सैकड़ों जानी मानी हस्तियों ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिख कर इस पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। इसे हेट स्पीच बताते हुए लोगों ने चिट्ठी है और कार्रवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखने वाले 262 हस्तियों में 14 पूर्व जज, 130 पूर्व अधिकारी और सेना के 118 रिटायर अधिकारी शामिल हैं।

इन हस्तियों ने तमिलनाडु सरकार पर कार्रवाई की मांग की है क्योंकि इनका कहना है कि राज्य सरकार ने उदयविधि स्टालिन पर कोई कार्रवाई नहीं की। चिट्ठी लिखने वालों में तेलंगाना हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के श्रीधर राव, पूर्व रक्षा सचिव और राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण, भारत सरकार के पूर्व सचिव समीरेंद्र चटर्जी और धनेंद्र कुमार और पूर्व रॉ चीफ संजीव त्रिपाठी भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने दो सितंबर को सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की थी। उन्होंने कहा था- मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना ये कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका केवल विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है। सनातन धर्म भी ऐसा ही है। इसके खिलाफ चिट्ठी लिखने की पहल दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज एसएन ढींगरा और भारत सरकार के सचिव रहे गोपाल कृष्ण ने की। इन्होंने हेटस्पीच रोकने और शांति व्यवस्था संभालने के लिए विचार करने की मांग भी की है।

चिट्ठी में लिखा गया कि उदयनिधि स्टालिन ने भारत के एक बड़े हिस्से के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण दिया है। संविधान में भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है इसलिए यह बयान सीधे तौर पर संविधान के खिलाफ है। इसके अलावा तमिलनाडु सरकार ने स्टालिन के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया, बल्कि उन्हें बचाने की कोशिश की। यह कानून का उल्लंघन है। चिट्ठी में सुप्रीम कोर्ट के 2021 के एक आदेश का भी जिक्र है, जिसमें अदालत ने राज्य सरकारों को नफरत फैलाने वाले भाषण या बयान पर तुरंत एक्शन लेने का आदेश दिया था।

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