नई दिल्ली। ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन में आम सहमति से मंजूर किए गई ‘नई दिल्ली घोषणा’ में अमेरिका के एकतरफा टैरिफ और आतंकवाद पर जोरदार हमला किया गया है। सदस्य देशों ने एक राय से कहा है कि एकतरफा टैरिफ लगाने को बरदाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर एकतरफा टैरिफ लगाने की निंदा की गई है। साथ ही आतंकवाद के मसले पर भी सभी सदस्य देशों ने सख्त रुख अख्तियार किया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले का खास तौर से विरोध करते हुए इस घोषणा में कहा गया है कि सभी सदस्य देश आतंकवाद रोकने के लिए मिल कर काम करेंगे।
गौरतलब है कि शनिवार को ब्रिक्स के 18वें सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें पहले दिन 140 प्वाइंट वाली ‘नई दिल्ली घोषणा’ को आम सहमति से मंजूर किया गया है। सभी सदस्यों देशों के बीच घोषणा पर आम सहमति बनना बड़ी बात है क्योंकि इसमें ईरान और सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात तीनों शामिल हैं, जिनके बीच जंग चल रही है। लेकिन ईरान में चल रही जंग और यूक्रेन युद्ध का सीधा जिक्र किए बगैर ‘न्यू डेल्ही डिक्लेरेशन’ में सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की आलोचना की गई है। हालांकि गाजा की हालत का जिक्र किया गया है और इजराइल की जम कर आलोचना भी की गई है।
इस साझा घोषणा में संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधार की जरुरत बताई गई है और कहा गया है कि रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की सदस्यता का समर्थन करेंगे। बहरहाल, साझा घोषणा में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई है और सदस्य देशों ने कहा है कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है।
माना जा रहा है कि ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में साझा घोषणा पर आम सहमति बनना बड़ी बात है क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात के कई मुद्दों पर अलग अलग रुख हैं। बताया जा रहा है कि भारत ने लगातार बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। जानकार सूत्रों का कहना है कि ईरान चाहता था कि अमेरिका और इजराइल की निंदा हो लेकिन भारत ने इसके बगैर ही सहमति बनवाई।
साझा घोषणा में सदस्य देशों के बीच आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति से फैसलों पर जोर दिया गया है। इसमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर चिंता जताई गई है। साथ ही ब्रिक्स देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स प्लस और आउटरीच संवाद की तारीफ की।
