नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट यूजी परीक्षा को लेकर तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय का भी वही रुख है, जो पुराने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का था। विजय ने गुरुवार को नीति आयोग की बैठक में नीट यूजी की परीक्षा का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा से ग्रामीण इलाकों के और गरीब परिवार के बच्चों पर बहुत बुरा असर हुआ है। ध्यान रहे पेपर लीक की वजह से इस साल की नीट यूजी की परीक्षा रद्द हो गई है।
गौरतलब है कि गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक हुई। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उप राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के अधिकारी शामिल हुए। भाजपा शासित दो राज्यों पश्चिम बंगाल और बिहार के मुख्यमंत्री पहली बार इस बैठक में शामिल हुए। गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी ने मई में और सम्राट चौधरी ने अप्रैल में सीएम पद की शपथ ली।
ऐसे ही गैर भाजपा और गैर एनडीए शासित तीन राज्यों के नए मुख्यमंत्री पहली बार बैठक में शामिल हुए। इनमें कर्नाटक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन शामिल हैं। विजय ने बैठक में नीट परीक्षा का विरोध करते हुए कहा कि नीट शुरू होने के बाद ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों पर असर पड़ा है। विजय ने तमिलनाडु के राज्य कोटा की एनबीबीएस, बीडीएस और आयुष सीटों पर 12वीं के अंकों के आधार पर दाखिले की मांग की।
बहरहाल, नीति आयोग की बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समावेशी मानव विकास पर चर्चा हुई। बैठक में मानव विकास, रोजगार, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषण, समान अवसर और डिजिटल गवर्नेंस जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। बैठक में राज्यों के विकास विजन को राष्ट्रीय विजन के साथ जोड़ने, विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और उनके प्रभावी अमल की रणनीति पर भी विचार विमर्श हुआ।
