चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया। उन्होंने राज्यपाल को 121 विधायकों की सूची सौंपी थी लेकिन बुधवार को बहुमत परीक्षण में उनको 144 वोट मिले। विजय के बहुमत साबित करने के साथ ही ई पलानीस्वामी की पार्टी अन्ना डीएमके टूट गई। अन्ना डीएमके के 25 विधायकों ने सरकार का समर्थन किया। बाद में पलानीस्वामी ने एसपी वेलुमणि और सीवी षणमुगम को पार्टी से निकाल दिया।
इससे पहले बुधवार को जब मुख्यमंत्री विजय का बहुमत हासिल करने का प्रस्ताव सदन में रखा गया तो वोटिंग के समय 171 विधायक मौजूद थे। इनमें से 144 ने टीवीके सरकार का समर्थन किया। टीवीके के पक्ष में अन्ना डीएमके के 25 बागी विधायकों ने भी वोट डाला। गौरतलब है कि अन्ना डीएमके के 47 विधायक हैं। इनमें से 22 ने टीवीके सरकार का विरोध किया। वोटिंग के दौरान 59 विधायकों वाली डीएमके ने वॉकआउट कर दिया। मुख्यमंत्री विजय की पार्टी के अपने 107 विधायक हैं। इनके अलावा कांग्रेस, दोनों वामपंथी पार्टियों, वीसीके और मुस्लिम लीग ने सरकार का समर्थन किया है।
सदन मे मौजूद पीएमके के चार और भाजपा के एक विधायक ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। सदन में सरकार के बहुमत साबित करने के साथ ही अन्ना डीएमके में फूट पड़ गई। पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के महासचिव ई पलानीस्वामी और सीवी षणमुगम में गुट में बंट गई। इस बीच सदन में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने अन्ना डीएमके के बागी विधायकों और विजय की मुलाकात पर सवाल उठाया और कहा कि यह मुलाकात बदलाव है या सौदेबाजी? उन्होंने यह भी कहा कि क्या यही आपकी साफ सुथरी सरकार है?
एक दूसरा बड़ा घटनाक्रम यह हुआ कि फ्लोर टेस्ट पास करने के कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री विजय ने ज्योतिषी राधन पंडित को अपने विशेष कार्य अधिकारी यानी ओएसडी पद से हटा दिया। विजय ने 24 घंटे पहले ही उन्हें जिम्मेदारी दी थी, लेकिन विपक्ष और सहयोगी पार्टियों के विरोध के बाद फैसला वापस लेना पड़ा। राधन लंबे समय से विजय के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने विजय के मुख्यमंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी। उनकी सलाह पर ही 10 मई को विजय के शपथ ग्रहण का समय भी बदला गया था। राधन ज्योतिषी होने के साथ टीवीके के प्रवक्ता भी रहे हैं।
