अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद् नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की कड़ी आलोचना करते हुुए दावा किया कि कई अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में अपनी भूमिका के कारण वे इस पुरस्कार के हकदार थे।
श्री ट्रंप ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर लगभग 600 शब्दों की एक पोस्ट में इस साल की विजेता नवी पिल्लई की योग्यता पर सवाल उठाए और उन पर इज़राइल का विरोध करने का आरोप लगाया। श्री ट्रंप ने लिखा, “मैं इस महिला के बारे में कुछ नहीं जानता और कोई और भी नहीं जानता! मुझे नहीं पता कि इस महिला ने क्या किया है।”
गौरतलब है कि भारतीय मूल की श्रीमती पिल्लई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश और मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र की पूर्व उच्चायुक्त रह चुकी हैं और उन्हें शांति एवं अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। उन्होंने कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्षता भी की है।
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श्रीमती पिल्लई ने पुरस्कार मिलने पर कहा कि विश्व नेताओं की ‘मानवाधिकारों की रक्षा करने और युद्ध से दूर रहने की कानूनी जिम्मेदारी’ है। श्री ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्ध सुलझाए हैं और दो और को सुलझाने के करीब हैं। उन्होंने ईरान से जुड़े विवादों और यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैंने आठ युद्ध सुलझाए और जिन देशों की मैंने मदद की, उनके राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों ने नॉर्वेजियन नोबेल समिति को पत्र भेजे।”
उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इसे सुलझाने के उनके अकेले के प्रयास ही यह सम्मान पाने के लिए काफी होने चाहिए थे। श्री ट्रंप ने कहा, “असल में मुझे आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे, न कि सिर्फ़ एक।” श्री ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की भी आलोचना की और दावा किया कि जिन विवादों का उन्होंने जिक्र किया, उन्हें सुलझाने में संयुक्त राष्ट्र की कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने लिखा, “जिन सभी युद्धों को मैंने सुलझाया, उनमें मैंने कभी संयुक्त राष्ट्र से बात नहीं की-उनसे कोई मदद नहीं मिली।” उन्होंने कहा कि अमेरिका को, जिसका प्रतिनिधित्व उन्होंने किया, यह पुरस्कार मिलना चाहिए था। श्री ट्रंप ने इस फैसले को लेकर नॉर्वे पर भी निशाना साधा, जबकि नॉर्वे खुद नोबेल शांति पुरस्कार नहीं देता है। यह सम्मान नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा चुना जाता है। उन्होंने लिखा, “यह नॉर्वे पर एक ऐसा अमिट दाग है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।” उन्होंने इस पुरस्कार को ‘हमेशा के लिए बदनाम’ करार दिया और इसके लिए ‘लोकतंत्र-विरोधी और सभ्यता के दुश्मन कट्टरपंथी विचारकों’ को जिम्मेदार ठहराया।
Pic Credit : UNI
