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शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं

नई दिल्ली। चीन की ओर से आधिकारिक रूप से पुष्टि हो गई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच 2020 में गलवान घाटी में चीन व भारत के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद राष्ट्रपति जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। वे 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स के 18वें लीडरशिप समिट में हिस्सा लेंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की पुष्टि पहले ही हो गई थी। वे शुक्रवार को तड़के भारत पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी दोपक्षीय वार्ता भी होनी है।

बहरहाल, चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। सात साल के बाद हो रहे इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति  जिनपिंग के बीच दोपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद है। गौरतलब है कि 15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात मानी थी। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की कई वैश्विक मंचों पर मुलाकात हुई लेकिन उसके बाद शी का यह पहला दौरा है। कुछ दिन पहले ही दोनों की मुलाकात बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान हुई थी।

दो दिन के ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपति जिनपिंग एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आएंगे। सीमा विवाद से लेकर व्यापार और सामरिक मसलों पर दोनों के बीच दोपक्षीय वार्ता भी हो सकती है। चीन और रूस सहित 11 देशों के नेता ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। गौरतलब है कि भारत और चीन के अधिकारी पिछले कई महीनों से दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल 24 अगस्त को चीन गए थे, जहां उन्होंने सीमा विवाद पर चीन के विशेष प्रतिनिधि और वहां के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी।

सीमा विवाद के अलावा भारत चाहता है कि चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने का प्रयास किया जाए। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या पार्ट पुर्जों की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। बहरहाल, ब्रिक्स सम्मेलन में मेजबान भारत के साथ सभी सभी सदस्य देश रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इथियोपिया, यूएई और इंडोनेशिया भी शामिल होंगे।

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