Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

मानसून सत्र से बहुत कुछ बदलेगा

संसद के मानसून सत्र से सरकार बहुत कुछ बदलने जा रही है। संसद के अंदर विपक्ष का स्वरूप बदलना शुरू हो गया है। सत्र के दौरान यह और बदला हुआ दिखाई देगा। लेकिन उससे ज्यादा बड़ा बदलाव देश की संसदीय व्यवस्था में होने वाला है। सरकार अगर 130वां संविधान संशोधन विधेयक और अप्रैल के विशेष सत्र में विफल हुए 131वें संशोधन विधेयक को पास करा लेती है तो बहुत कुछ बदल जाएगा। पिछली बार तो विपक्ष ने एकजुट होकर संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को रोक दिया था। लेकिन इस बार लग नहीं रहा है कि विपक्ष इसे रोक पाएगा। सरकार इस बार बहुत तैयारी में है।

अगर ये दोनों विधेयक पास होते हैं तो देश की राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था में कुछ बेहद बुनियादी परिवर्तन होंगे।

गौरतलब है कि सरकार पिछली बार चूक गई थी और दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने की वजह से नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का विधेयक पास नहीं हो सका था। उसके बाद सरकार ने परिसीमन के विधेयक को पास कराने का प्रयास नहीं किया। असल में सरकार तीन विधेयक लेकर आई थी, जिसमें एक संविधान संशोधन विधेयक के लिए विशेष बहुमत यानी दो तिहाई बहुमत की जरुरत थी। बाकी दोनों विधेयक साधारण बहुमत से पास हो सकते थे। लेकिन जब संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हुआ तो सरकार ने बाकी दो विधेयक को पास कराने का प्रयास नहीं किया। इस बार सरकार किसी तरह से दो तिहाई बहुमत जुटाने में लगी है।

अगर वह दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाएगी तो बहुमत का आंकड़ा ही घटाने का प्रयास किया जाएगा। दूसरी ओर विपक्ष लगातार बिखर रहा है। सो, यह तय है कि अगर सरकार विधेयक लाती है तो इस बार नहीं हारेगी। इस बार सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों का स्वरूप काफी हद तक बदल दिया है। तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिव सेना की टूट और कांग्रेस के डीएमके से अलग होने की वजह से लोकसभा में सरकार की ताकत बढ़ी है। उधर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के छह सांसदों के भाजपा में शामिल होने, दोवार्षिक चुनाव में अतिरिक्त सीट जीतने और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के इस्तीफे से सरकार की ताकत बढ़ी है।

बहरहाल, अगर सरकार पिछली बार विफल हुए 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पेश करके पास करा लेती है तो इसका अर्थ होगा कि अभी हो रही जनगणना के आंकड़ों की बजाय पहले की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन होगा। लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ा कर साढ़े आठ सौ कर दी जाएगी। सभी राज्यों में प्रो राटा बेसिस पर 50 फीसदी सीटें बढ़ा दी जाएंगी। पिछले विधेयक की तरह इस बार सरकार गलती नहीं करेगी। वह स्पष्ट रूप से विधेयक में इस बात का जिक्र करेगी कि सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ाई जा रही है और कुल सीटें साढ़े आठ सौ की जा रही हैं। पिछली बार संख्या का जिक्र नहीं होने के कंफ्यूजन बना था। संसद के इस सत्र में यह भी तय हो जाएगा कि बढ़ी हुई संख्या का एक तिहाई यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस आरक्षण के भीतर एससी और एसटी को आरक्षण मिलेगा लेकिन ओबीसी के लिए इसमें अलग से आरक्षण नहीं होगा। कई पार्टियां इसकी मांग कर रही हैं।

ऐसे ही परिसीमन का विधेयक पास होने से सरकार को एक परिसीमन आयोग बना कर सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ साथ उनकी भौगोलिक और जनसंख्या संरचना बदलने का अधिकार मिल जाएगा। चूंकि परिसीमन आयोग के अध्यक्ष का चुनाव सरकार करेगी, केंद्र की सरकार भाजपा की है और राज्यों में भी ज्यादातर सरकारें भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टियों की है इसलिए परिसीमन में भाजपा की भूमिका सबसे ज्यादा होगी। यह भी कह सकते हैं कि परिसीमन का काम उसके हिसाब से होगा, जैसा असम और जम्मू कश्मीर में हुआ है। इससे लोकसभा और विधानसभा सीटों की भौगोलिक व जनसंख्या संरचना ऐसे बदल जाएगी कि पलड़ा भाजपा के पक्ष में झुक जाएगा।

संविधान का 130वां संशोधन विधेयक भी मानसून सत्र में पेश किए जाने की खबर है। इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र व राज्य का कोई मंत्री किसी गंभीर मामले में गिरफ्तार होता है और लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है तो वह स्वतः पदमुक्त हो जाएगा। यानी इस्तीफा दिए बगैर ही वह 31वें दिन पद से हट जाएगा। इस कानून के लिए सरकार ने अरविंद केजरीवाल के मामले की मिसाल बनाई है। जाहिर है प्रधानमंत्री को कोई गिरफ्तार नहीं कर सकता है और न केंद्र में सत्तारूढ़ दल के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों आदि की गिरफ्तारी आसानी से होगी।

इसलिए यह कानून विपक्ष के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की ही मुश्किल बढ़ाएगा। विपक्ष ने इसका विरोध किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह विधेयक पेश किया था और विपक्ष के विरोध के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी में भेज दिया गया था। कहा जा रहा है कि संयुक्त संसदीय समिति विवादित प्रावधानों के साथ ही अपनी सिफारिश सरकार को देगी। हालांकि इसमें सुरक्षा के कुछ उपाय जोड़े जाने की बात है। जेपीसी की सिफारिश सत्र शुरू होने से पहले आ जाएगी और उसके बाद सरकार विधेयक तैयार करके संसद में पेश करेगी।

अगर जेपीसी की सिफारिश पर 130वां संशोधन विधेयक पास हो जाता है और पिछली बार फेल हुआ 131वां संशोधन विधेयक भी पास हो जाता है तो इससे सिर्फ संवैधानिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव ही सुनिश्चित नहीं होगा, बल्कि संसद के दोनों सदनों में सरकार का पहले जैसा वर्चस्व बहाल हो जाएगा। इसके बाद कुछ और चीजें देखने को मिलेंगी। जैसे ‘एक देश, एक चुनाव’ का बिल पास कराना भी सरकार के लिए आसान हो जाएगा। यह बिल पेश किया हुआ है और संयुक्त संसदीय समिति इस पर विचार कर रही है। लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान के कई प्रावधानों में संशोधन करने की जरुरत होगी। सरकार ऐसा कर पाती है या नहीं यह मानसून सत्र से पता चल जाएगा। इस लोकसभा का आधे से ज्यादा कार्यकाल बचा हुआ है। बचा हुआ कार्यकाल अभी तक बीते कार्यकाल से बहुत अलग होने वाला है। वह कैसा होगा इसका अंदाजा मानसून सत्र से मिल जाएगा।

Exit mobile version