nayaindia Election Lok Sabha चुनाव लोकसभा का रिपोर्ट कार्ड विधायक मंत्रियों का
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चुनाव लोकसभा का रिपोर्ट कार्ड विधायक मंत्रियों का

88 Lok Sabha Seat

भोपाल। प्रदेश में सभी 29 सीटों पर लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब नेताओं, विधायक और मंत्री मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है इसके लिए पार्टी ने पहले से ही तीन स्तर पर निगरानी रखी। किसने, कितना काम किया इसका लेखा-जोखा भी पार्टी का तैयार किया है और आगे के निर्णय भी इसी रिपोर्ट कार्ड के आधार पर लिए जाएंगे।

दरअसल, प्रदेश की सभी 29 सीटों पर 2019 के मुकाबले 4% का मतदान हुआ है। पहले चरण में 7% से ज्यादा और दूसरे चरण में 8% से ज्यादा मतदान कम होने पर पार्टी ने सक्रियता दिखाई। तीसरे चरण में पॉइंट 3% ज्यादा मतदान हुआ लेकिन चौथे चरण में फिर 4% से ज्यादा कम मतदान हुआ। पहले चरण के मतदान के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विधायक और मंत्रियों को हिदायत दी थी कि जिन मंत्रियों के यहां मतदान प्रतिशत कम होगा उनके मंत्री पद भी जा सकता है और जिन विधायकों के क्षेत्र में मतदान प्रतिशत ज्यादा रहेगा उनको मंत्री भी बनाया जा सकता है। इसके बाद तीसरे चरण में मंत्रियों और विधायकों ने पूरा जोर लगाया।

तीसरे चरण में दिग्गजों का चुनाव क्षेत्र भी था। मतदान प्रतिशत भी बढ़ गया लेकिन चौथे चरण में फिर मतदान प्रतिशत गिर गया। इस पूरे उतार-चढ़ाव के घटनाक्रम पर पार्टी के राष्ट्रीय हाई कमान की पूरी निगाहें थी। केंद्रीय नेतृत्व में दो रिपोर्ट तैयार करवाई है। एक रिपोर्ट संगठन के स्तर पर जो दूसरे राज्यों के भेजे गए नेता तैयार कर रहे थे और एक रिपोर्ट एक निजी एजेंसी के माध्यम से तैयार कराई गई है। प्रदेश संगठन ने भी इस तरह का आंकलन करवाया है और इन तीनों रिपोर्ट को मिलाकर नेताओं की कुंडली तैयार की जा रही है। तीनों रिपोर्ट में सभी 29 लोकसभा सीटों पर विस्तार से जानकारी रहेगी।

खासकर जहां सांसदों की टिकट काटे गए थे वहां उन निर्वतमान सांसदो और उनके समर्थकों ने कितनी सक्रियता से पार्टी का काम किया इसका भी आंकलन किया गया है। मसलन ग्वालियर, गुना, विदिशा, भोपाल, सागर, बालाघाट, धार और झाबुआ सीट के सांसदों की टिकट काटे गए थे यहां की रिपोर्ट में यह एक्स्ट्रा बिंदु रखा गया है।

बहरहाल, विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक और मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्र में जो बढ़त पार्टी ने बनाई थी क्या लोकसभा चुनाव के दौरान उस विधानसभा क्षेत्र से उतनी ही बढ़त मिली इसी में तुलनात्मक अध्ययन के लिए एक कालम यह भी है कि पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी को विधानसभा या लोकसभा में जो बढ़त मिली थी जो मतदान प्रतिशत रहा था उसमें कितना अंतर आया है।

सूत्रों की माने तो हमेशा की चेतावनी के बाद विधायक और मंत्रियों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र में पूरा जोर लगाया लेकिन इसके बावजूद भी पिछले लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव की तरह ना तो मतदान प्रतिशत कर पाए और ना ही वैसा प्रचार प्रसार कर पाए। अब इसका भी पार्टी ने आंकलन किया है। पूरी रिपोर्ट फाइनल 4 जून को परिणाम आने के बाद होगी क्योंकि यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत कम रहा है लेकिन पार्टी की जीत का अंतर पिछले लोकसभा चुनाव की तरह है तो फिर इसे कांग्रेस की कमजोरी मानकर भाजपा विधायक को सकारात्मक माना जाएगा।

कुल मिलाकर भविष्य की जमावट की दृष्टि से लोकसभा चुनाव को आधार बनाकर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में तीन स्तरों पर नेताओं का मूल्यांकन कराया है इसमें टिकट देने और टिकट कटने के असर का भी लेखा-जोखा होगा। वहीं किसी विशेष क्षेत्र में किसी के मंत्री बनाने या मंत्री न बनाने से क्या असर हुआ है इसका भी आंकलन किया गया है। सो, माना यही जा रहा है भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां का निर्धारण लोकसभा चुनाव की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर होगा।
जाहिर है चुनाव लोकसभा का हुआ है और परफॉर्मेंस रिपोर्ट विधायक मंत्रियों और नेताओं की तैयार हुई है।

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