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दीयों में तेल कहां है!

कई राज्यों में भाजपा सरकारों की ओर से दीया बांटा जा रहा है। हो सकता है कि तेल और बाती भी बांटी जाए। लेकिन क्या असल में देश के लोगों के दीये में तेल बचा है? लोग चीनी 75 रुपए और प्याज 70 रुपए खरीद रहे हैं। सरकार ने 35 रुपए प्याज बिकवाने की योजना शुरू की थी लेकिन पता नहीं किसको उसका लाभ मिला। पूरे देश में पेट्रोल एक सौ रुपए लीटर से ज्यादा कीमत पर बिक रहा है और डीजल की कीमत भी सौ रुपए लीटर तक पहुंच गई है। डॉलर की कीमत कृत्रिम तरीके से 95 या 96 रुपए पर रोकी गई है। प्रधानमंत्री लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील कर रहे हैं लेकिन देश में सोना खरीदने लायक अब कितने लोग बचे हैं? प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत डेढ़ लाख रुपए से ऊपर है। प्रधानमंत्री घूमने या शादी वगैरह के लिए विदेश नहीं जाने की अपील कर रहे हैं। लेकिन उसके लायक तो एक फीसदी लोग भी नहीं हैं। विदेशी मुद्रा चाहे डॉलर हो या पाउंड या यूरो सबकी कीमत इतनी हो गई है कि पहले जो लोग अफोर्ड कर सकते थे वे भी अब नहीं जा सकते हैं।

मोदी ने दावा किया था कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में चलेगा। लेकिन आज स्थिति यह है कि सूट बूट वाले जो पहले हवाई जहाज में चलते थे उनका भी उड़ना बंद हो गया है या कम हो गया है। पिछले 12 साल में जेट एयरवेज से लेकर गो एयर तक कई विमानन कंपनियां बंद हो गईं और दो कंपनियों का एकाधिकार हो गया, जो मनमाने तरीके से किराया तय करती हैं। सरकार एकाध सौ कारोबारियों की संपत्ति और आय में बढ़ोतरी के आधार पर बढ़ रहे जीडीपी के आंकड़े दिखा कर लोगों से उसे सेलिब्रेट करने की अपील कर रही है। लेकिन असलियत अलग है। लोगों को न अच्छी शिक्षा मिल रही है और न अच्छा रोजगार मिल रहा है।

देश में हजारों की संख्या में स्कूल बंद हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 94 हजार से ज्यादा स्कूल बंद हो गए हैं। निजी स्कूलों की पढ़ाई आम आदमी की पहुंच से बाहर है। खुद नीति आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 8.7 करोड़ युवा, जिनकी उम्र 15 से 29 साल के बीच है वे कुछ नहीं कर रहे हैं। कुछ नहीं करने का मतलब है कि न तो पढ़ रहे हैं, न किसी चीज की ट्रेनिंग ले रहे हैं और न कोई नौकरी या रोजगार कर रहे हैं। सोचें, दुनिया के डेढ़ सौ से ज्यादा देश ऐसे हैं, जिनकी आबादी नौ करोड़ नहीं है लेकिन भारत में उतने लोग ऐसे हैं, जो न पढ़ रहे हैं, न कुछ सीख रहे हैं और न कुछ काम कर रहे हैं।

जहां पढ़ाई हो रही है वहां एकेडेमिक कैलेंडर समय से नहीं चल रहा है। समय पर परीक्षा नहीं हो रही है, परीक्षा हो रही है तो पेपर लीक हो जा रहा है, पेपर हो भी जा रहा है तो नतीजे नहीं आ रहे हैं और नतीजे आ रहे हैं तब भी नौकरी नहीं मिल रही है। केंद्र सरकार के विभागों में आठ लाख से ज्यादा पद खाली हैं। राज्यों में भी लाखों की संख्या में पद खाली हैं और नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। पूरा देश हिंदू-मुस्लिम, अगड़ा-पिछड़ा और एससी-एसटी के विमर्श में उलझा है।

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