भारत के युवा अब कॉकरोच बन रहे हैं। सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट बना। इंस्टाग्राम अकाउंट इसी नाम से है लेकिन जब सरकार ने एक्स पर दबाव बना इनका एक्स अकाउंट बंद कराया तो दूसरा अकाउंट बना कॉकरोच इज बैक। मतलब कॉकरोच होना मुख्य है। बात शुरू हुई थी चीफ जस्टिस के कॉकरोच वाले बयान से, जिसमें उन्होंने कह दिया था कि जिनके पास डिग्री नहीं होती है और रोजगार नहीं होता है वे भी वकील या एक्टिविस्ट बन कर हर चीज पर सवाल उठाते रहते हैं। बाद में उन्होंने सफाई भी दी लेकिन ऐसा लग रहा है कि कॉकरोच बनने के लिए तैयार बैठे नौजवानों को यह मौका लगा और उन्होंने अपनी पहचान जाहिर कर दी।
सोचें, कुछ समय पहले चौकीदार बनने की होड़ मची थी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने को चौकीदार कहा था और जब राफेल का विवाद हुआ तो राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है का नारा लगाया। इसके बाद मैं भी चौकीदार की मुहिम शुरू हुई। भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया में अपने बायो में चौकीदार लिखना शुरू किया। इसी तरह कुछ दिन पहले एक मुहिम शुरू हुई, जो अब भी चल रही है, जिसमें भाजपा के समर्थक ही नहीं, नेता, मंत्री आदि भी सोशल मीडिया में अपने बायो में मोदी का परिवार लिख रहे हैं। सब मोदी का परिवार बन रहे हैं। जिनका अपना परिवार नहीं है या है तो परिवार की बेहतरी के लिए जो कोई काम नहीं कर रहे हैं वे भी अपने को मोदी का परिवार लिख रहे हैं।
सवाल है कि यह कैसा भारत बन रहा है, जिसमें लोग कॉकरोच बन कर खुश हैं, अपने को चौकीदार बता कर खुश हैं या मोदी का परिवार बन कर खुश हैं? क्या अच्छे दिन में यही सब कुछ होना था? 2014 से पहले जब युवा कॉकरोच नहीं होते थे, चौकीदार नहीं होते थे, किसी नेता का परिवार नहीं होते थे तब क्या उनका अस्तित्व नहीं था? तब लोगों का ज्यादा स्वतंत्र अस्तित्व था। तब लोगों में आकांक्षा थी। लोग भारत गाथा का हिस्सा थे। दुनिया भारत की कहानी को बड़े गौर से देख रही थी। लेकिन अचानक देश में भक्त बनने का चलन शुरू हुआ, जो कॉकरोच बनने तक पहुंच गया है।
जब लोग भक्त, चौकीदार, कॉकरोच या किसी नेता का परिवार नहीं थे तब देश जिंदादिल नौचवानों का था, वे अपने हक को लेकर जंतर मंतर आबाद करते थे, रामलीला मैदान में रैलियां होती थीं, सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन होते थे, हजारों नहीं लाखों की भीड़ स्वंयस्फूर्त तरीके से जुट जाती थी। निर्भया के हक के लिए नौजवान इंडिया गेट घेर लेता था और राष्ट्रपति भवन के दरवाजे खड़खड़ा देता था। भ्रष्टाचार के खिलाफ विशाल आंदोलन खड़ा कर देता था। लेकिन आज क्या है? आज देश में करोड़ों नौजवान ऐसे हैं, जो कॉकरोच की श्रेणी वाले हैं। उनके पास नौकरी नहीं है, रोजगार नहीं है, पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन सफल होने की संभावना नगण्य है, सवा दो करोड़ से ज्यादा ने कॉकरोच का सोशल मीडिया हैंडल ज्वाइन किया है लेकिन 10 हजार भी जंतर मंतर पर नही जुटेंगे।
