भाजपा चाहती है कि देश के ऐसे लोग, जिनको प्रधानमंत्री की योजनाओं का लाभ मिला है वे उनके जन्मदिन पर दीया जलाएं। भाजपा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान चला रही है, जिसमें ‘आशीर्वाद का दीया’ नाम से एक कार्यक्रम है। गौरतलब है कि दिवाली में इस तरह व्यापक रूप से दीया जलाया जाता है, जिसका अर्थ खुशी मनाना और समृद्धि दिखाना या समृद्धि की आकांक्षा प्रकट करना होता है। लेकिन जिन लोगों को पांच किलो अनाज मिल रहा है या शौचालय बनाने का पैसा मिल रहा है या महिला और किसान सम्मान निधि का पैसा मिल रहा है उनके पास कौन सी समृद्धि है, जिसे दीया जला कर प्रकट करेंगे? भाजपा और उसकी सरकार जिनको लाभार्थी बता रही है उनके पास सरकार की ओर से मिल रही ‘रेवड़ी’ के अलावा कुछ नहीं बचा है। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि जो मध्य वर्ग है यानी जो सरकार की ‘मुफ्त की रेवड़ी’ नहीं पा रहा है उसकी स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो मध्य वर्ग का एक बड़ा हिस्सा भी लाभार्थी बनेगा।
यह बात कई आंकड़ों से प्रमाणित होती है। सरकार के अपने आंकड़ों के मुताबिक देश में कर्ज बढ़ रहा है। सरकार के ऊपर कर्ज तो ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है और आवास व वाहन का कर्ज भी बढ़ रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा आम आदमी की चिंता दिखाने वाली बात यह है कि निजी कर्ज और सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने की मात्रा में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। यह लोगों के ऊपर पड़ रहे वित्तीय दबाव का सबूत है। पिछले 10 साल में भारत में पर्सनल लोन में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सिबिल की रिपोर्ट के मुताबिक पर्सनल लोन में 17 से 18 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ोतरी हो रही है। कुछ समय पहले तक बैंकों के पोर्टफोलियो में पर्सनल लोन का हिस्सा बहुत कम था, जो आज बढ़ कर 30.7 फीसदी से ज्यादा हो गया है। यह बैंकों का सबसे ज्यादा कर्ज देने वाला सेक्टर हो गया है।
इसी तरह सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। पिछले पांच साल में इसमें चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और यह कर्ज 18 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है। पिछले 12 साल में सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने में 14 गुना की बढ़ोतरी हुई है। गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं के सोना गिरवी रख कर कर्ज देने की मात्रा में हर साल 65 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं यानी एनबीएफसी में सोना गिरवी रखने वालों में बहुत से लोग सोना छुड़वा नहीं पा रहे हैं। वे ब्याज नहीं चुका पा रहे हैं और सोना वहीं रह जा रहा है। ऐसी घटनाओं में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका एक कारण यह भी है कि गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं या सिर्फ सोना गिरवी रख कर लोन देने वाली कंपनियों की ब्याज दर बहुत ज्यादा है। लोग ब्याज दर नहीं चुका पा रहे हैं या सोने की कीमत बढ़ने का लाभ उठा कर पहले से रखा सोना गिरवी रख कर छोड़ दे रहे हैं या बेच दे रहे हैं। यह इकोनॉमी से ज्यादा एक बड़ी आबादी के डिस्ट्रेस में होने का संकेत है।
