प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की उन उपलब्धियों की बात करें, जो सचमुच बताने लायक हैं या जिन्हें सही अर्थों में उपलब्धि कह सकते हैं तो उसमें सबसे पहले जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेज 35ए हटाने का फैसला है। हालांकि इन्हें हटाने से पहले भी इनका असर बहुत कम रह गया था। फिर भी इन दोनों को हटाना बड़ा फैसला था। अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन करने के बाद वहां शांति बनाए रखना और आतंकवादी घटनाओं को तुलनात्मक रूप से कम कर देना बड़ी उपलब्धि है। हालांकि उसके बाद जो बदलाव होने चाहिए थे और जम्मू कश्मीर को जिस तरह भारत की मुख्यधारा से जुड़ना चाहिए था वह नहीं हो सका।
इसी तरह नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए एक वास्तविक उपलब्धि है। जिस तरह दुनिया में यहूदियों के लिए एक देश इजराइल है वैसे ही हिंदुओं के लिए एक देश भारत है। इसलिए यह कानून होना चाहिए कि अगर कोई हिंदू कहीं से प्रताड़ित होकर भारत आता है तो उसे नागरिकता मिले। इस दिशा में सीएए से एक पहल हुई। हालांकि यह कानून सिर्फ पड़ोस के इस्लामिक देशों से आने वाले गैर मुस्लिमों के लिए है फिर भी यह अच्छी पहल है। हालांकि सरकार ने कानून बनाने के बाद पांच साल तक इसके नियम अधिसूचित नहीं किए और जब किए भी तो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए गैर हिंदुओं को नागरिकता देने की रफ्तार बहुत धीमी और प्रक्रियागत परेशानियां ज्यादा हैं।
ऐसे ही राम मंदिर के निर्माण को कम से कम भाजपा के नजरिए से उपलब्धि कह सकते हैं क्योंकि भाजपा ने इसे दशकों पहले अपना राजनीतिक मिशन बनाया था। हर चुनाव में घोषणापत्र में इसे शामिल किया जाता था। भले जमीन का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने किया लेकिन यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद मंदिर निर्माण का काम आसान हो गया। अदालत के फैसले के बाद रिकॉर्ड टाइम में इसे बनाया गया। हालांकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसमें भी स्मृति चढ़ावा चोरी की रहेगी।
मुस्लिम महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए तीन तलाक खत्म करने और उसे अपराध बनाने का कानून भी एक बड़ा सुधारवादी कदम है। हालांकि राम मंदिर और तीन तलाक दोनों भाजपा के लिए चुनाव प्रचार का मुद्दा हैं।
