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बुढ़ापे में युवा होते नेता

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देश में युवक-युवतियों की शादी की उम्र भले तय कही गई हो पर नेताओं ने खुद को लगता है इससे अलग रखा। यानी नेताओं के लिए राजनीति में आने की न तो कोई उम्र की सीमा तय की गई और न ही रिटायरमेंट की। तभी हर दूसरा नेता खुद को युवा बनाए रखने के लिए न जाने क्या-क्या हथकंडे अपनाता रहता है। पर हाँ यह ज़रूर है कि इस कथित जवानी को लेकर नेताओं को राहुल गांधी याद ज़रूर रहते हैं।यह अलग बात है कि भाजपाई अगर उन्हें युवा कहकर चुटकी लेने से नहीं चूकते हैं तो उन्हें पॉपी कहने से इन्हें गुरेज़ नहीं रहा । यह बात दूसरी है कि राहुल गांधी पप्पू भले 2014 के बाद हुए हों पर युवा तो अब बताए जाने लगे हैं। पिछले दिनों जब रेलमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस हुई तो इसका समापन राहुल गांधी को युवा चुटकी लेने हुआ। मंत्री जी कह रहे थे कि टेक्नोलॉजी में हो रहे विकास का लाभ युवाओं को मिलेगा, अब अपने मंत्री जी मृदुभाषी तो हैं ही सो एक पत्रकार ने मंत्री जी चुटकी ली ,बोले आप भी तो युवा ही हैं।

तब मंत्री भला कैसे चूकते क़ाबिलियत की कोई कमी तो है नहीं मंत्री जी में कि वे चुप्पी साध लेते, बोले अरे भाई 50 के बाद कौन युवा होता है,थोड़ी देर ठहरे फिर बोले 50 के बाद तो युवा एक ही हैं राहुल। मंत्री जी बात कहकर पहले खूब हंसे फिर बाक़ी लोगों ने भी ठहाके लगाए और निकल लिए। अब मंत्री जी को यह कौन बताए कि भाजपा में भले वानप्रस्थ आश्रम की उम्र के दौरान भी नेता बाल काले और चेहरे की मसाज करा युवा दिखने जुगत में रहते हैं पर हाल ज़्यादातर का ऐसा ही है सो बोलते नहीं पर कांग्रेस में तो अक्सर नेता बनने की उम्र ही 50 से शुरू होती होगी तो युवा नहीं कहे जाएँगे तो कहा भी क्या जाए। अब युवक कांग्रेस की बात करो तो नेता कितने युवा होते यह तो नहीं पता नहीं पर कहे युवक कांस नेता ही हैं। भला होता कि शादी की उम्र की तरह ही नेता बनने की भी उम्र तय कर दी तो आज भाजपा युवा मोर्चा और युवक कांग्रेस में राजनीति के असल हीरो भी देखने को मिलते पर काश: ।

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By ​अनिल चतुर्वेदी

जनसत्ता में रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव। नया इंडिया में राजधानी दिल्ली और राजनीति पर नियमित लेखन

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