nayaindia Donald Trump ट्रंप के पापों का घड़ा बहुत बड़ा!
श्रुति व्यास

ट्रंप के पापों का घड़ा बहुत बड़ा!

Share

डोनाल्ड ट्रंप का पिछला हफ्ता काफी बुरा गुज़रा। न्यूयार्क के एक जज ने उन पर करीब 45 करोड़ डॉलर का जुर्माना ठोका। इसलिए क्योंकि जज इस नतीजे पर पहुंचे कि ट्रंप ने अपनी नेटवर्थ (संपत्ति की कुल कीमत) में हेरफेर की। जज ने पाया कि ‘द ट्रंप आर्गेनाइजेशन’ (ट्रंप के सभी व्यवसायों की होल्डिंग कंपनी) ने अपनी संपत्ति की कीमत बढ़ा-चढ़ा कर बताई ताकि उसे बेहतर शर्तों पर ज्यादा क़र्ज़ मिल सके। और ट्रंप को पता था कि हेराफेरी का। वे ही इसके लिए ज़िम्मेदार हैं।जाहिर है धोखाधड़ी के इस दीवानी मामले में यह उनकी बड़ी हार है।

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने धोखाधड़ी नहीं की है बल्कि यह मुकदमा उनके साथ धोखाधड़ी है और वे फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। मगर अभी ट्रंप के सामने समस्या है 45 करोड़ डॉलरकी जुगाड़ करना। इस फैसले से ट्रंप का नगदी का खज़ाना करीब-करीब खाली हो जायेगा। इसके अलावा अगले तीन साल तक ट्रंप आर्गेनाइजेशन पर उनका नियंत्रण नहीं रहेगा।

जज आर्थर एन्गोरों के फैसले का एक उद्देश्य ट्रंप आर्गेनाइजेशन के कामकाज के तरीके को बदलना है।ट्रंप तीन साल तक कंपनी से दूर रहेंगे और उनके दो सबसे बड़े बेटे, जो कंपनी के को-चीफ एग्जीक्यूटिव हैं, वे भीदो साल तक। सन 2022 से कंपनी की देखभाल कर रहे स्वतंत्र मॉनिटर का कार्यकाल तीन साल और बढ़ जायेगा। इसके अलावा एक स्वतंत्र अधिकारी और नियुक्त होगा जो यह देखेगा कि अदालत का फैसला ठीक से लागू हो रहा है या नहीं।

कंपनी को तीन साल तक न्यूयार्क में पंजीकृत किसी ऋणदाता से क़र्ज़ लेने का हक़ नहीं होगा। अपीलीय अदालतें संभवतः अपील सुनने के पहले इस आदेश पर रोक लगा देंगीं। मगर इस प्रक्रिया में भी कम से कम दो साल लगेंगे।जज आर्थर का यह कड़ा फैसला अक्टूबर में शुरू हुई और 11 महीने तक चली सुनवाई के बाद आया है।मुक़दमे के दौरान ट्रंप के व्यवहार ने भी उन्हें बहुत नुकसान पहुंचा। उन्होंने जज आर्थर की क्लर्क का सोशल मीडिया पर जमकर अपमान किया। जज ने ट्रंप पर क्लर्क के बारे में कुछ भी कहने पर रोक लगा दी। मगर ट्रंप नहीं माने और नतीजे में उन्हें 15 हज़ार डॉलर का जुर्माना अदा करना पड़ा। बल्कि ट्रंप ने जज को भी नहीं छोड़ा। अंतिम बहस के दौरान अपना बचाव करते हुए ट्रंप ने जज को खरीखोटी सुनायी।ट्रंप से कहा, “मुझे मालूम है आप बोर हो रहे हैं। आपका अपना एजेंडा है, यह मैं समझता हूँ। आप मेरी बात एक मिनट से ज्यादा नहीं सुन सकते।”

इस तरह कानूनी और आर्थिक – दोनों दृष्टियों से ट्रंप के लिए गुज़रा हफ्ता ख़राब रहा। हालाँकि हमेशा की तरह वे ऊटपटांग बातें करते रहे। आगे आने वाले दिन उनके लिए और ख़राब होंगे।  अगले महीने से एक पोर्न स्टार को मुंह बंद रखने के लिए पैसा देने के आरोप में ट्रंप पर न्यूयार्क में मुकदमे की कार्यवाही शुरू होने वाली है।ट्रंप के वकीलों ने सुनवाई टलवाने की भरसक कोशिश की मगर उन्हें कामयाबी नहीं मिली। मुक़दमे के लिए जूरी का चुनाव 25 मार्च को होगा।

अगर ट्रंप को नवम्बर में चुनाव के पहले फौजदारी मामले का सामना करना ही है तो ट्रंप के वकील चाहेंगे कि वो पोर्न स्टार वाला मामला हो क्योंकि इसमें मुजरिम पाए जाने पर भी उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा। इससे वोटरों का ध्यान उन और गंभीर मुकदमों से हट जायेगा जो फ़ेडरल कानूनों के उल्लंघन से जुड़े हुए हैं।

ट्रंप को जहां45 करोड़ डॉलर का जुर्माना भरना है वही जीन कैरल नाम की एक लेखिका को 8.8 करोड़ डॉलर चुकाने है।ट्रंप ने कई दशकों पहले इस महिला का यौन उत्पीड़न किया था और पिछले कुछ सालों से वे उसे बदनाम कर रहे थे।

इस सबका ट्रंप की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी साफ़ नहीं है। मगर पहले की तरह, वे इस आपदा को भी अवसर में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। वे “भ्रष्ट डेमोक्रेट्स” पर “चुनाव में हस्तक्षेप” करने का आरोप लगा रहे हैं। वे मुकदमों का इस्तेमाल जनता की हमदर्दी हासिल करने के लिए कर रहे हैं। मारा-लागो में अपने घर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन अपने राजनैतिक प्रतिद्वंदियों को ठिकाने लगाने के लिए जिस तरह का अभियान चला रहे हैं, वैसा अमरीका में इसके पहले कभी नहीं हुआ।

मगर ट्रंप के पापों का घड़ा भरता जा रहा है। जिस दिन वो फूटेगा, उस दिन ट्रंप के व्हाइट हाउस में फिर से रहने के सपने का हश्र क्या होगा, इसका उत्तर ढूँढना बहुत कठिन नहीं है। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Naya India स्क्रॉल करें