nayaindia Golden Globe Awards गोल्डन ग्लोब्ससे आस्कर के संकेत?
श्रुति व्यास

गोल्डन ग्लोब्ससे आस्कर के संकेत?

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वर्ष का यह वह समय है जब दुनिया भर में फिल्म पुरस्कारों की घोषणा होती है। सिनेमा दर्शक विजेताओं की सूची खंगालते होते है और नज़र रेड कार्पेट पर रहती है। वर्ष का पहला आयोजन – गोल्डन ग्लोब्स– नए साल के पहले रविवार को हुआ और पिछली गर्मियों का ‘बारबेनहाईमर‘ बुखार, पुरस्कारों के ताजा दौर में भी दिखा। कई अन्य शानदार फिल्मों जैसे ‘किलर्स ऑफ द फ्लावर मून’, ‘माइस्ट्रो’, ‘पुअर थिंग्स’, ‘एनाटामी ऑफ  फॉल’, ‘मे दिसंबर’, ‘पास्ट लाईव्स’ के बावजूद ‘बार्बी’ एवं ‘ओपेनहाईमर’ के पुरस्कार हासिल करने के कयास लगाए जा रहे थे।

पहले थोड़ी चर्चा गोल्डन ग्लोब्स की। अतीत में इन पुरस्कारों की जम कर निंदा और आलोचना हुई है। गोल्डन ग्लोब्स पुरस्कार देने वाली संस्था हालीवुड फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (एचएफपीए) 2021 में तब विवादों में घिर गई थी जब उस पर भ्रष्टचार और विजेताओं के चुनाव के लिए मतदान करने वाले पैनल में विविधता की कमी के आरोप लगे थे। इसके नतीजे में 2022 का आयोजन अपेक्षाकृत बहुत छोटे स्तर का कर दिया गया ताकि चीज़ों को सुधारा जा सके। और इस वर्ष इस आयोजन ने तूफानी वापसी की। लॉस एंजेल्स के बेवरली हिल्टन में हुआ तीन घंटे का यह आयोजन, हालीवुड प्रेस एसोसिएशन के भंग होने और एक निजी इक्विटी फर्म व डिक क्लार्क प्रोडेक्शन्स द्वारा अवार्ड्स का संभालने का बाद का पहला आयोजन था। अब उसमें 76 देशों के 300 सदस्य हैं और वह सदस्यों की पृष्ठभूमि की दृष्टि से विविधतापूर्ण है।

सन् 2024 के नॉमिनेशन्स से यह जाहिर हुआ है कि नई और बड़ी चयन समिति मोटे तौर पर लीक पर ही चली हालाँकि कुछ चौंकाने वाला भीथा। जैसे पिछले साल सूची में एक भी महिला निर्देशक नहीं थी। लेकिन इस साल ऐसा नहीं है। ग्रेटा गर्विक (‘बार्बी‘) और सलीन सोंग (‘पास्ट लाईव्स’) सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पुरस्कार के लिए लाइन में थीं। एक और आश्चर्य था ‘पास्ट लाइव्स, जो कि जटिल प्रेम त्रिकोण में फंसे एक कोरियाई प्रवासी की कहानी है का अन्य श्रेणियों में भी नामांकन। एक अन्य आश्चर्य था टेलर स्विफ्ट की फिल्म (‘टेलर स्विफ्ट: द एरास टूर’) को नामांकित करने के लिए एक नयी श्रेणी, ‘सिनेमेटिक एंड बॉक्स ऑफिस अचीवमेंट’ का निर्माण। इस श्रेणी में पुरस्कार अंततः बार्बी को मिला।

बारबेनहाईमर 2023 की गर्मी से ही चर्चाओं के केन्द्र में है। महामारी के बाद रिलीज़ होने वाली ये पहली फिल्म थीं और इस बात का इम्तहान थीं कि क्या दर्शकों को दुबारा सिनेमाघरों की ओर आकर्षित किया जा सकेगा। और ये लेखकों की हड़ताल के पहले की आखिरी फिल्में थीं। जहाँ बार्बी दर्शकों को आनंदित करने वाली फिल्म थी, जो बाद में बाक्स आफिस पर हिट रही, वहीं ‘ओपनहाईमर’ एक गंभीर फिल्म थी, जिसकी चर्चा मुख्यतः उसके निर्देशक क्रिस्टोफर नोलान के कारण हुई। नोलान पारंपरिक कथानकों से बखूबी खेलते हैं और अवचेतन मन और सैद्धांतिक खगोल भौतिकी जैसे दुरूह विषयों पर फिल्मों का निर्देशन करते रहे हैं। ओपेनहाईमर समीक्षकों की पसंदीदा फिल्म बनी और बार्बी, इस प्रसिद्ध गुडिया के युवा प्रशंसकों और उनके अभिभावकों की।

लेकिन गोल्डन ग्लोब्स में सबसे बड़ी विजेता रही ‘ओपेनहाईमर’।उसने पांच पुरस्कार हासिल किए, जिनमें सर्वोत्तम कहानी, सर्वोत्तम अभिनेता (सिल्लियन मर्फी) सर्वोत्तम गीत (लुडविग गोरंस्सों) सर्वोत्तम सहायक अभिनेता (रोबर्ट डाउनी जूनियर) और सर्वोत्तम निर्देशक (क्रिस्टोफर नोलान) शामिल हैं। हालांकि ओपेनहाईमर का मुख्य मुकाबला मार्टिन स्कोर्सेसे की “किलर्स ऑफ द फ्लावर मून” से था, मगर उसे केवल एक पुरस्कार मिल सका – सर्वोत्तम अभिनेत्री के लिए लिली ग्लोडस्टोन को। ग्लोडस्टोन, जीतना तो दूर, नामांकित होने वाली पहली अमेरिका की मूलनिवासी कलाकार हैं। संभवतः नई, पुनगर्ठित हालीवुड फारेन प्रेस एसोसिएशन के कारण अन्य देशों की फिल्मों को कई पुरस्कार हासिल हुए, जिनमें सबसे आश्चर्यजनक था फ्रेंच फिल्म “एनाटामी ऑफ ए फाल” के लिए जस्टिन ट्राईट और आर्थर हरारी को सर्वोत्तम स्क्रीनप्ले का पुरस्कार, जो उसे बार्बी, किलर्स ऑफ द फ्लावर मून और ओपेनहाईमर से मुकाबला करते हुए हासिल हुआ। साथ ही उसे सर्वोत्तम गैर-अंग्रेजी फिल्म का पुरस्कार भी मिला। जापानी निदेशक हेयो मियाजाकी की फिल्म ‘द बॉय एंड द हेरोन’ को सर्वोत्तम एनीमेशन के लिए पुरस्कृत किया गया। टीवी सीरियलों के वर्ग में ज्यादातर पुरस्कार ‘सक्सेशन’ ने हासिल किए।

गर्मियों का ‘बारबेनहाईमर’ माहौल, पुरस्कारों के इस पहले दौर में केवल ओपेनहाईमर के लिए बना रहा। लेकिन क्या गोल्डन ग्लोब्स, आगे आस्कर के संभावित विजेताओं के बारे में भी कोई संकेत देता है? (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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