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श्रुति व्यास

चीन की अपने ही हाथों बदनामी!

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हांगकांग सुर्खियों में है। इस हफ्ते वहां लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता और पूर्व मीडिया शहंशाह जिमी लाई पर लंबे समय से रूके मुकदमे की कार्यवाही शुरू हुई। यह मुकदमा हांगकांग की वैश्विक प्रतिष्ठा को कसौटी पर कसेगा।

लाई हांगकांग का एक जाना-माना नाम था और है। एक मीडिया शहंशाह और लोकतंत्र-समर्थक कार्यकर्ता के तौर पर वे इस क्षेत्र में सीसीपी (चीन की कम्युनिस्ट पार्टी) के सबसे शक्तिशाली आलोचकों में से एक थे। वे बंद हो चुके लोकतंत्र-समर्थक समाचार पत्र ‘एप्पल डेली’ के संस्थापक थे और 2014 के अंब्रेला मूवमेंट विरोध प्रदर्शनों और 2019 के प्रत्यर्पण कानून विरोधी प्रदर्शनों में सबसे आगे रहे थे। हांगकांग का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून इसी तरह की असहमति को कुचलने के लिए बनाया गया था।

माना जा रहा है कि करीब 250 कार्यकर्ताओें, सांसदों और प्रदर्शनकारियों को इसके उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया है। लाई राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का निशाना बनने वाले सबसे प्रमुख और शुरूआती व्यक्तियों में से एक थे। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत विदेशी शक्तियों से मिलीभगत के साथ ही राजद्रोह का आरोप भी लगाया गया है। यदि उन्हें दोषी पाया जाता है, जिसे कई लोग लगभग निश्चित मान रहे हैं, तो इस ब्रिटिश नागरिक को अपनी बची हुई पूरी जिंदगी जेल के सींखचों के पीछे बितानी पड़ेगी।

बीजिंग लंबे समय से चीन की मुखर आलोचना के कारण  लाई और उनके ‘एप्पल डेली’ समाचारपत्र से नफरत करता रहा है। सन् 1995 में स्थापित एप्पल डेली जल्दी ही चीनी भाषा का एक लोकप्रिय टेबोलाईड बन गया जिसमें हल्की-फुल्की सामग्री और हांगकांग व बीजिंग की सरकार की आलोचना का मिश्रण होता था। सन् 2021 में हांगकांग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत अखबार की संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया, उसके दफ्तरों पर छापा मारा और उसके कई प्रमुख संपादकों और लेखकों को गिरफ्तार कर लिया। (पूरे हांगकांग में उस वर्ष प्रकाशित हुए उसके अंतिम अंक को खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गईं थीं )। लाई पर लगाए गए आरोप अंशतः एप्पल डेली में प्रकाशित उन लेखों पर आधारित हैं जिनमें चीनी एवं हांगकांगी अधिकारियों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाने का आव्हान किया गया था। प्रॉसिक्यूशनका तर्क है कि यह विदेशी शक्तियों के साथ सांठ-गांठ करने जैसा है! समाचारपत्र के छह कर्मचारियों ने सन् 2022 में इस आरोप को सही बताया।

लाई पर चलाया जा रहा यह मुकदमा पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का दायरा असाधारण रूप से व्यापक है। इसके क्षेत्राधिकार में ऐसे लोग, जो हांगकांग के निवासी नहीं हैं द्वारा हांगकांग के बाहर की की गयी गतिविधियां भी शामिल हैं। लाई को ब्रिटेन के टिम ओवेन नामक अपनी पसंद के वकील की सेवाएं लेने की इजाजत नहीं दी गई (मुकदमे की कार्यवाही शुरू होने में हुए देरी का एक कारण यह विवाद भी था) और जूरी के बजाए उनके मुकदमे की सुनवाई  सरकार द्वारा नियुक्त न्यायाधीश करेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत चले मुकदमों में दोषसिद्धी की दर 100 प्रतिशत है। न्याय विभाग के मंत्री ने इस बात पर बल दिया है कि यदि कोई आरोपी बरी हो भी जाता है तो उसे दुबारा मुलजिम बनाया जा सकता है। इस बात की प्रबल संभावना है कि लाई को अपनी बची हुई जिंदगी जेल में गुजारनी पड़े। इसके और लाई के ब्रिटिश नागरिक होने के मद्देनजर ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड केमरून और अमरीका ने अब जाकर उन पर मुकदमा चलाए जाने की निंदा की है और उनकी रिहाई की मांग की है।

जिमी लाई का मुकदमा निःसंदेह एक ढकोसला है और मूलतः अन्यायपूर्ण है। यह मुक़दमा खुले न्यायालय में चलाया जा रहा है। इस मुकदमे की कार्यवाही में सारी दुनिया के लोगों की रूचि है। हांगकांग के रहवासी तो सोमवार को मुक़दमे की कार्यवाही देखने के लिए कतारों में खड़े हुए। यह मुकदमा न केवल एक मुखर प्रमुख मीडिया व्यवसायी से संबंधित है बल्कि दरअसल यह बीजिंग-शासित हांगकांग के भविष्य से भी संबंधित है। हालाँकि, फैसला क्या होगा, यह शायद पहले से ही तय है। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

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By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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