nayaindia US Presidential debate Nikki Haley लडाकू वक्ता है भारतीय मूल की निक्की!
श्रुति व्यास

लडाकू वक्ता है भारतीय मूल की निक्की!

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रिपब्लिकनों के डिबेट्स जारी हैं। वे विदेश नीति, घरेलू मामलों, दोनों युद्धों में क्या ठीक हो रहा है और क्या गलत, गर्भपात संबंधी अधिकारों, लोकतांत्रिक अधिकारों पर, और एक दूसरे के नीचा दिखाने के लिए बहस कर रहे हैं। हाल में हुई चौथी टीवी बहस व्यक्तिगत टकरावों से शुरू हुई और उन्हीं पर खत्म भी। यह सब डोनाल्ड ट्रंप का विकल्प बनने के लिए किया जा रहा है, जो अब तक हुए एक भी डिबेट में शामिल नहीं हुए हैं। बावजूद इसके उम्मीदवारी की दौड़ में सबसे आगे हैं। इकोनोमिस्ट ट्रेकर के अनुसार ट्रंप के निकटतम प्रतिद्वंद्वी रॉन डीसानटिस उनसे बहुत पीछे हैं और ट्रंप को उन पर 51 प्रतिशत की बढ़त हासिल है। जैसे-जैसे आयोवा काकस का समय निकट आ रहा है, लगभग सभी विश्लेषक यह मानकर चल रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ही रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार होंगे और संभवतः चुनाव जीतकर दूसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बनेंगे।

हालांकि ट्रंप कानूनी झंझटों में फंसे हुए हैं – चार आपराधिक प्रकरणों में और 91 अन्य अपराधों में – जिनसे उनके दूसरे कार्यकाल के अरमान पूरे होने में बाधा पड़ सकती है। लेकिन, फिलहाल, 77 वर्षीय ट्रंप बाकी सभी रिपब्लिकनों से आगे हैं। ट्रंप के कार्यकाल में उप-राष्ट्रपति रहे माईक पेंस सहित कई उम्मीदवार मैदान छोड़ रहे हैं। विवेक रामास्वामी, जिनके बारे में कहा जाता था कि वे ट्रंप के अलावा बाकी सभी उम्मीदवारों से आगे रहेंगे – अपनी चमक-दमक और गति खोते जा रहे हैं। हालांकि दक्षिण कैरोलिना की पूर्व गवर्नर और ट्रंप के कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीका की राजदूत रहीं निक्की हैली आश्चर्यजनक तेजी से उभर रही हैं। वे मजाकिया हैं और कड़े मुकाबले भरे पिछले तीन डिबेट्स में उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है।

उनके प्रतिद्वंदियों ने लगातार उन पर वार किए। राजनीति में यह आपके आगे बढ़ने का संकेत होता है! डीसानटिस ने पहले से ही हैली द्वारा गवर्नर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान चीनी निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को लेकर उनकी आलोचना करने वाले विज्ञापन देना प्रारंभ कर दिया है, जिसमें और तेजी और तल्खी आने की संभावना है। विवेक रामास्वामी तो शुरूआत से ही उन्हें ट्रोल करते रहे हैं। पिछली रात हुई डिबेट के दौरान एक बार उन्होंने अपना पैड उठाकर दिखाया जिस पर उन्होंने लिखा था “निक्की = भ्रष्ट”।जब उन्होंने हैली पर ‘पहचान की राजनीति’ करने का आरोप लगाया तो श्रोताओं ने उन्हें हूट किया। और जब हैली से पूछा गया कि क्या वे इस आरोप का जवाब देना चाहेंगीं, तो उन्होंने कहा, “नहीं। मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहूंगी”।दर्शकों ने इस पर उन्हें जम कर चीयर किया।

निक्की ने साबित कर दिया है कि वे एक लड़ाकू वक्ता हैं। वे अपने प्रतिद्वंदियों पर तीखे प्रहार करती हैं। और आम लोग, प्रचारक और प्रायोजक जिंदादिल निक्की को पसंद कर रहे हैं। उन्हें ऐसे रईस दानदाताओं से भरपूर धन और प्रचार हेतु अन्य संसाधन मिल रहे हैं जो ट्रंप का विकल्प तलाश रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि अब दूसरे स्थान के लिए उनके और फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसानटिस के बीच कांटे की टक्कर चल रही है। डीसानटिस को पहले काफी मज़बूत माना जा रहा था। निक्की के कुछ समर्थक डीसानटिस को छोड़कर उनके साथ आये हैं तो कुछ दक्षिण कैरोलिना के सीनेटर टिम स्कॉट को छोड़कर। टिम ने 12 नवम्बर को रेस को अलविदा कह दिया था।

लेकिन इस सबके बावजूद, निक्की मतों की दृष्टि से डीसानटिस और ट्रंप से बहुत पीछे हैं। और जैसे-जैसे मुकाबला कड़ा होता जा रहा है, वह अधिकाधिक दिलचस्प भी हो रहा है। ट्रंप को हालांकि अच्छी-खासी बढ़त हासिल है, लेकिन यदि वे लड़खड़ाते हैं या उन्हें जल्दी ही कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ता है, तो सिर्फ रिपब्लिकन प्रायमरी ही नहीं बदलेंगी आगे का माहौल भी बदलेगा। बाइडन ने एक फंडरेजिंग इवेंट में इसी सप्ताह कहा ‘‘यदि ट्रंप मुकाबले में न होते, तो मैं पक्के तौर पर नहीं कहा सकता कि मैं मैदान में होता या नहीं”। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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