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मंत्री के कार्यक्रम से नेता नदारत

Minister State External Affairs

कांग्रेस के चिंतन शिविर में दिल्ली के नेताओं को लेकर कितनी चिंता जताई गई होगी यह तो कांग्रेसी जानते होंगे लेकिन केन्द्रीय राज्य मंत्री और भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी से पार्टी के ही नेताओं की नाराज़गी ज़रूर चिंता की बात है। राज्य मंत्री के कार्यक्रम से जिस तरह उनके ही संसदीय क्षेत्र के नेताओं ने दूरी बनाई उससे कहीं न कहीं मतभेद तो ज़रूर उभरे दिखने लगे हैं। अब किन नेताओं को कार्यक्रम का न्यौता दिया गया और किसको नहीं यह अलग बात है पर पिछले एक हफ़्ते में न तो किसी ने इन नाराज नेताओं के मन की बात सुनने की कोशिश की और न ही नाराज़ नेताओं ने अपने मन की बात पार्टी के किसी नेता से शेयर की है। पर जिस तरह इन नेताओं के बीच गाँठें पड़ती दिख रहीं हैं उससे कम से कम क्षेत्र की राजेंद्र नगर विधानसभा सीट के उप चुनाव में ये गाँठें पार्टी के लिए दिक़्क़त ज़रूर खड़ी करती दिख रही हैं।

भला हो अपनी राज्य मंत्री और सांसद मीनाक्षी लेखी का कि उन्होंने गुटबाज़ी की शिकार हुई अपनी टीम को इससे उबरने और नया जोश भरने के लिए बुजुर्गों की आड़ लेकर उनके लिए हेल्थ कैंप लगाया। केंप में जाँच तो की ही गई साथ ही बुजुर्गों को चश्मे, व्हील चेयर और छडीं भी दी गईं ताकि इस बहाने पब्लिक भी जुड़ेगी और नेता भी। पर पब्लिक तो जुड़ी और खूब जुड़ी पर नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी ही बनाए रखी। नेताओं के नाम पर सिर्फ़ पूर्व पार्षद मालती वर्मा, विद्या और मंडल के कुछ पूर्व अध्यक्ष ही पहुँचे। जबकि क्षेत्र के तीनों मौजूदा पार्षद छैलबिहारी,सुनीता कौशिक और परमजीत सिंह राणा के अलावा पूर्व विधायक, पार्षद,और प्रदेश पदाधिकारियों ने भी अपनी नेता के इस कार्यक्रम से तो दूरी रखी ही साथ ही अपने क़रीबियों को भी इस कार्यक्रम से दूर रखा। अब नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी रखकर क्या संकेत देने की कोशिश की होगी यह बाद की बात रही पर मंत्री महोदया ने तो अपनी तीनों महिला नेताओं की तारीफ़ कर यहाँ तक कह डाला कि कोविड जैसी गंभीर महामारी में लोगों की जनसेवा कर इन नेताओं ने जो काम किया वह भुलाया नहीं जा सकता। अब चलो कार्यक्रम तो निपट गया लेकिन विधानसभा का उप चुनाव या निगम चुनाव के लिए उम्मीदवारों पर मुहर के लिए राय तो सांसद की भी होगी। दावेदारों में बस चिंता इसी की है। संभव है तभी सांसद महोदय इन नेताओं से कार्यक्रम में नहीं आने की बाबत उनके मन की बात समझ सकें।

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