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टिकट का इंतज़ार ख़त्म, उम्मीदवार मैदान में

Panchayat Municipal Elections BJP

राजेंद्र नगर विधानसभा उप-चुनाव के लिए दावेदारों की आपाधापी ख़त्म हो गई और अब सवाल है किसकी बादशाहत रहेगी इस सीट पर ? भाजपा इस सीट को फिर से हासिल कर पाएगी, या भाजपा से सीट हासिल करने वाली आप पार्टी अपनी बादशाहत बनाए रखेगी। या फिर डेढ़ दशक पहले इस सीट पर रही कांग्रेस इसे फिर हासिल कर पाएगी। ऐसे ही अनगिनत सवाल यहाँ के वोटरों के ज़ेहन में हैं। भाजपा ने अपने लोकल उम्मीदवार और पूर्व पार्षद व प्रदेश महामंत्री रहे राजेश भाटिया को इस सीट को पार्टी की झोली में लाने की ज़िम्मेदारी दी है। तो दिल्ली की सत्ता पर क़ाबिज़ आप पार्टी ने विदेश में पढ़ाई कर राजनीति में उतरे दुर्गेश पाठक को वहीं कांग्रेस ने पूर्व पार्षद प्रेमलता को। प्रेमलता को दिल्ली के पूर्व मंत्री रमाकांत गोस्वामी का बर्दहस्त हासिल है। और गोस्वामी की क्षेत्र में अच्छी पैंठ रही है। टोडापुर, दसघरा इलाक़े में आज भी प्रेमलता लोगों से जुड़ी हुई हैं बल्कि लोग उन पर भरोसा भी रखते हैं। आप पार्टी के विधायक राघव चड्डा के राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर उप-चुनाव हो रहा है।

हालाँकि चड्डा से पहले भी सीट से आप पार्टी से बिजेन्द्र गर्ग विधायक थे। लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नज़दीकी होने के चलते गर्ग की टिकट चड्डा को दी गई और उन्होंने भाजपा के आर पी सिंह को हरा यह सीट हासिल की थी। यह बात दूसरी रही कि गर्ग को इससे पहले हुए चुनाव में आर पी सिंह ने ही हराया था। ऐसी ही कहानी आप पार्टी की भी रही है। गर्ग स सीट से दुबारा टिकट के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन पार्टी ने उन्हें तब्बजो नहीं दी और दुर्गेश पाठक पर भरोसा जताया है। हालाँकि दुर्गेश भी विधानसभा का एक चुनाव भाजपा के मोंहन सिंह बिष्ट से हार चुके हैं। बाबजूद इसके पार्टी ने दुर्गेश पाठक पर दांव लगाया है। तक़रीबन 1,80000 मतदाता वाली इस विधानसभा में क़रीब 99 हज़ार पुरूष और करीब 78 000 हज़ार महिला मतदाता होने के साथ ही तीन थर्ड जेंडर मतदाता भी हैं। यह अलग बात है कि पंजाबी बाहुल्य राजेंद्र नगर विधानसभा भाजपा का गढ़ रहा है और कई दमदार नेताओं ने यहाँ पार्टी का परचम फहराया है पर अब ऐसी बात नहीं। धीरे-धीरे विधानसभा का स्वारूप बदलता गया और अब कुल वोटरों में से आधे पूर्वांचल के वोटर हैं। आप पार्टी से दुर्गेश पाठक को चुनाव लड़ाने के पीछे भी पार्टी की यही सोच हो सकती है। जुझारू और सौम्य स्वाभाव के पाठक पूर्वांचल से ताल्लुक़ रखते हैं। टिकट मिलने से पहले ही से क्षेत्र में लोगों को भरोसा दे रहे हैं कि वे लोगों के सरकार से जुड़े काम कराएँगे पर लोग उन पर कितना भरोसा करते हैं यह देखने की बात रहेगी। भाजपा के राजेश भाटिया की साफ़-सुथरे नेताओं में गिनती हैं। निगम में रहते हुए भी उन्होंने लोगों के मनमुताबिक काम कराए। पूर्व विधायक के अलावा पार्टी के कई प्रदेश पदाधिकारियों ने भी दावेदारी की लेकिन राजेश भाटिया की छवि और जीत के भरोसे के चलते उन्हें मैदान में उतारा है। अब बाज़ी कौन मारता है यह अलग बात है पर भाजपा और आप पार्टी दोनों ही में भितरघात की संभावना बनी हुई है। हाँ कांग्रेस ऐसी कम उम्मीद दिख रही है।

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