हिंदू-मुस्लिम से ही भारत पिछड़ा!

नंबर एक मसला, हिंदू-मुस्लिम-4 : अपने ज्ञानी स्तंभकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने हाल में लिखा कि ‘कहां चीन और कहां भारत?’ और बताया कि आज चीन में प्रति व्यक्ति आय 10 हजार डालर से ज्यादा है जबकि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2000 डालर के आस-पास है। यानी चीन हमसे पांच गुना आगे है। हम चीन के पहले आजाद हुए और चीन प्रारंभिक कई वर्षों तक कम्युनिस्ट बेड़ियों में जकड़ा रहा, फिर भी उसने इतनी जल्दी इतनी उन्नति कैसे कर ली? पर ऐसा अकेले चीन का ही कमाल नहीं है। दुसरे महायुद्ध में बरबाद, धूल-धुसरित हुए जर्मनी, जापान का कमाल है, इजराइल का कमाल है, रूस का कमाल है व कई योरोपीय देशों का कमाल है तो दक्षिण-पूर्व एसिया, अफ्रिका, लातीनी अमेरिका के कई देशों का भी यह कमाल है जो विकास और जीवन की गुणवत्ता में छलांगे मारते हुए भारत से, मतलब हिंदू-मुस्लिम समस्या लिए हुए दक्षिण एसिया से कई गुना बेहतर है। आप नहीं मानेंगे इस बात को और डा वैदिक ने भी ऐसी स्थिति के लिए सोचंे छह कारणों में यह कारण नहीं बताया मगर अपना मानना है कि भारत पिछड़ा है तो वजह हिंदू बनाम मुस्लिम समस्या में भारत का चिरंतन, लगातार फंसे रहना है!

जरा गौर करें ‘चिरंतन’ शब्दपर! इसके पीछे का भाव भारत के तेरह सौ साल का अनुभव है। तेरह सौ साल के अनुभव में भारत, भारत के हम हिंदू जिस गुलामी, जैसी मानसिक अवस्था में जीये है उसने हमारी बुद्धि को मंद, कुंद और ढीला-गुलाम बनाया है। शुतुरमुर्गी, भक्तिवादी बनाया है। गुलामी का सिलसिला क्योंकि कई सदियों का अनुभव लिए हुए है तो तलवार, हाकिम, सत्ता से डरा होना डीएनए का हिस्सा है और सत्ता की लालसा भी डीएनए का हिस्सा है। सत्ता पा लेना या जीवन को जी लेना ही अपने आप में बहुत है।

तभी हम हिंदू और हिंदुस्तान बाकि सभ्यतागत देशों से एकदम अलग है। मतलब हस्ती मिटेगी नहीं मगर बनेगी नहीं! प्राचीन, धर्म विशेष लिए सभ्यता-संस्कृति के तमाम वैश्विक उदाहरणों में हमारी और उनकी तुलना करते हुए यदि नेहरू बनाम माओ बनाम प्रथम जर्मन चांसलर कॉनरॉड हरमन, नेहरू बनाम द गाल, नरसिंहराव बनाम देंग, गोल्डा मेयर बनाम इंदिरा गांधी, नरेंद्र मोदी बनाम शी जिन पिंग की लीडरशीप की बेसिक तुलना करें तो यह दो टूक हकीकत उभरेगी कि हिंदू लीडरशीप में बुद्धि, दृष्टि, दम संकल्प रहा कहां जो भारत का वह सफर बनता जिसके चलते दुनिया के दूसरे सभ्यतागत देश शिखर पर पहुंचे हुए हंै।

गांधी-नेहरू वे फैसले नहीं ले पाए जो इतिहास और वक्त का तकाजा था। माओं और देंग दोनों ने लोगों का जो खून -पसीना निकलवाया, प्रचंड राष्ट्रवादी दृढ़ता में संस्कृति और सभ्यता के गर्व में अपने को विश्व शक्ति बनाने की राह चुनी तो उसमें हर विग्रही जमात, भूमि का कठोरता से विलय कराया तो वहां मुसलमान को पल भर के लिए भी धर्म के पिंजरे में नहीं रहने दिया। कौन इस सत्य को नकार सकता है कि ऊईंगर मुसलमानों को आधुनिक बनाने, उन्हे हान सभ्यता का अनुगामी बनाने के लिए चीन में जोर जबरदस्ती नहीं हुई या नहीं है। मैं न तानाशाह समर्थक हूं और न साम्यवादी विचारधारा को मानने वाला। लेकिन इस बेसिक बात को तो सभी को मानना होगा कि राष्ट्र तब बनता जाता है जब लीडरशीप और लोग राष्ट्र की, राष्ट्र को बनाने की जिद्द लिए हुए हंै। माओ हो या सुधारवादी देंग या मौजूदा राष्ट्रपति ली जिन पिंग चीन के तमाम नेताओं ने दस तरह के प्रयोग किए, धुर एक दूसरे विपरित प्रयोग किए मगर बुद्धिमतता, संकल्पों की जिद्द और क्रूरता के साथ कम्युनिस्ट सिस्टम में भी अफसर और नौकरशाही, हाकिम, पार्टी कॉमरेड सभी को जवाबदेह बनाए रखा गया। भ्रष्टाचार-लूट को लोकचार, देश का व्यवहार नहीं बनने दिया गया। लोकतांत्रिक देशों  जर्मनी, जापान, इजराइल जैसे देशों में भी लीडरशीप ने (दगाल,कॉनरॉड हरमन, गोल्डा मेयर व मौजूदा नेतन्याहू-डोनाल्ड ट्रंप) ने नेतृत्व चमकाने, ब्राडिंग की लालसा के बावजूद फैसले बुद्धि-विश्व दृष्टि में किए।

मैं भटक रहा हूं। बुनियादी बात है कि आजाद भारत का सफर हिंदू बनाम मुस्लिम की समस्या में बने डीएनए याकि हिंदुओं का डरते हुए दो टूक फैसले नहीं ले सकना और हाकिमी-लूट-गुलामी (जिसकी तासीर मूलत दिल्ली सल्तनत में लूट और गुलामी के अनुभव से है) की व्यवस्था में जीने का रहा है तो विकास अपना वक्त के धक्के से है न कि कौम के पुरषार्थ से।

यह बेसिक बात है। और बतौर प्रमाण फिर यह भी सोचें कि 15 अगस्त 1947 में जन्म के बाद जम्मू-कश्मीर में कबाईली हमले से लेकर फिलहाल पूरे देश में नागरिकता विरोधी जो आंदोलन है तो पिछले बहत्तर साल कितनी लड़ाईयों, कितने आपरेशन, कितना खर्च, कितना खून-खराबा हिंदू -मुस्लिम समस्या के परिपेक्ष्य में हमारा हुआ है! भारत पहले दिन से अपनी सुरक्षा में जुटा हुआ है। ऐसा अनुभव चीन का नहीं है। उसके लिए ऐसी नौबत नहीं आई। उसने तिब्बतियों को भगा बाहर किया तो उईंगर मुसलमानों को कैंपों में डाला। रूस, विएतनाम, भारत को ठोक कर सीमाएं हमेशा के लिए सुरक्षित की। उन्होने न आर्थिकी में खिच़ड़ी बनाई तो न साम्राज्यवादी मंसूबे दिखलाने में कोताही बरती। दुनिया ताकत से, पैसे से चलती है तो उसी को सर्वोपरी लक्ष्य बनाया। यह नहीं कि पंडित नेहरू और नरेंद्र मोदी की तरह संयुक्त राष्ट्र में जा कर किसी चीनी नेता ने यह भाषण  झाडा कि हम जंगवादी नहीं बुद्धवादी, मध्यमार्गी!

तभी भारत राष्ट्र-राष्ट्र और हिंदू के बहत्तर साल झूठ, अर्द्ध-फर्जी विकास, विकृत सेकुलरवाद, अधूरे संविधान, दो हजार डालर की प्रतिव्यक्ति आमद और हर तरह के केहोस के साथ है। जब सब ऐसा है तो मै मूल वजह अपने चेतन-अवचेतन के हिंदू-मुस्लिम झमेले का है? कैसे इससे मुक्ति पाएं? क्या समाधान है? क्या उपाय  है? इस पर लंबा विचार करना होगा, लंबी सीरिज लिखनी होगी?  फिर कभी।

4 thoughts on “हिंदू-मुस्लिम से ही भारत पिछड़ा!

  1. हरिशंकर जी व्यास,

    आपने पूछा “क्या मेरी बात गलत है?” तो जवाब हैं निःसन्देह आपकी बात गलत है, आप दिग्भ्रमित है और पाठकों को भी भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

    लबोलुआब आजादी के बाद के काल का आलम यह है कि हिन्दू ने उड़ान नही भरी वरन हिन्दू जनमानस गांधी, नेहरू और वामपंथी चिन्तन की आत्ममुग्ध जकड़न में खोता गया और अपने ही धर्म से अनभिज्ञ रहा है। कुरीतियों के निवारण की ओट में स्वधर्म का उपहास ही नहीं किया अपितु हिन्दू धर्म और उसके मूल से भी अपरिचित रहा है। हिन्दू धर्म की शिक्षा, जानकारी का आधुनिक शिक्षा पद्धति में अभाव ही नहीं किया गया अपितु कानूनी वैधानिक तौर पर भी हिन्दू धर्म का जनसाधारण को अध्यापन न हो सके, ऐसे संवैधानिक प्रावधान किये गए, परिणाम हिन्दू धर्मविहीन होता गया, उसके मनोमस्तिष्क में धर्म की अप्रासंगिकता घर करती रही। रोमिला थापर, इरफान हबीब जैसे इतिहासकारों से हिन्दू जनमानस को धो धो कर विकृत किया। इसी का परिणाम है कि नया इंडिया का सम्पादक हरिशंकर व्यास जैसा तार्किक व्यक्ति भी हिन्दुओं के सर्वोच्च ग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता के मूल और श्री कृष्ण के जयघोष श्लोक –
    “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
    मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गो$स्तवकर्मणि।।” २/४७.
    का उपहासित लेख लिखने वाली और कुरीतियों की ओट में हिन्दुओं का मखौल उड़ाने वाली पत्रिका ‘सरिता’ के प्रकाशक को हिन्दूसुधी कह रहे है।

    ऐसे कई प्रकल्पों का संकल्प कई दशक तक हिंदी पाठकों, हिंदी फिल्मों में करोड़ों हिन्दूओं को आधुनिक बनाना नहीं रहा वरन अनभिज्ञ हिन्दुओं को धर्म विहीन करना रहा हैं। जिसे हरिशंकर जी आप जैसा आत्ममुग्ध हिन्दू, हिन्दुओं की आधुनिक उड़ान बता रहा है। असल में ऐसे संकल्पों, प्रकल्पों ने हिन्दुओं का न्यून विकास किया हैं इन क्रिया कलापों ने हिन्दू धर्म का वैज्ञानिक सकारात्मक प्रस्तुतिकरण नहीं किया है, जो कि हिन्दू धर्म का, हिन्दुओं के मनोमस्तिष्क चिन्तन का मूल सत्य तत्व रहा है। यह सब हिन्दू धर्म-समाज-व्यक्ति को आधुनिक बनवाने की आजाद उड़ान न थी बल्कि असल में यह सब सरकारी या नेहरू के सेकुलर आइडिया वाली कोशिश ही थी जिसमें मुस्लिमों के उलट हिन्दुओं को कमज़ोर कर धर्म विहीन किया जा सके।

    ठीक इसके विपरीत आजादी से चार दशक पूर्व से कांग्रेस और नेहरू ने मुस्लिमों के तुष्टिकरण को सुचारू रखा। 1947 के बाद भी मुसलमान रूका रहा पाकिस्तान परस्त सोच में उसके मुस्लिम दिमाग में भीतरखाने समझ आने लगी कि पाकिस्तान का जन्म कैसे, कब और क्यों हुआ? वोट लोलुप सेकुलरी सोच वाले हिन्दू ढोंगी पण्डित नेता अपना हिन्दू विरोधी सत्ता स्वार्थ सिद्ध करते रहे और सेकुलरी आवरण में हिन्दूओं को हिन्दू धर्म से अनभिज्ञ कर जात पात में विघटित करते रहे। इसी का परिणाम है कि हरिशंकर जी व्यास आप जैसा हिन्दू व्यक्ति भी; मुसलमान के लिए हिन्दू को समस्या मानता है, उसे अपनी लेखनी में उकेर जनसाधारण में संसय बनाता है पर हिन्दू मुसलमान के लिए समस्या कब और कैसे बना है उस पर तथ्यात्मक प्रकाश नही डालता है। लेखनी की यही विधा है शब्दों की जो दर्शाती है नेहरू के सेकुलरी आइडिया वाली पंगु सोच को।

    हाँ मैं फिर याद दिलाऊँ आपकी बात गलत है। आप दिग्भ्रमित भी है। एकतरफ भीतर अन्तस में आप स्वीकार कर रहे है मुसलमान का स्वभाव पाकिस्तान से वैचारिक मुग़ालते वाला, वैश्विक इस्लाम, वहाबी कट्टरता और दारूल इस्लाम वाला विजेता भाव तो दूसरी ओर विघटित, सहनशील, उदारवादी हिन्दु से मुसलमान को समस्या??

    हिन्दू जो थोड़ा बहुत जगा है और एकत्र हुआ है वह दक्षिण पंथी विरोध में, सेकुलरी सोच के लिये अनफिट है, यह आपके लेख लिखने की वजह बनी है। वरना विगत काल में जब मुसलमान लामबन्द रहता आया है हिन्दू और हिन्दूओं के ठगों को सत्ताधीश बनाता आया है, कभी ‘नंबर एक मसला, हिन्दू-मुस्लिम’ पर आपकी लेखनी आतुर न हुई शब्दों की ठग रचना रचने को? प्रश्न खड़े हैं आज भी द्रौपदी के चीरहरण पर चुप रहने वाले भीष्म पर। दोषी नरेन्द्र मोदी और अमित शाह नहीं है, दोषी धृतराष्ट्रवाली अन्धी सत्ता मोही कांग्रेसी सोच है जिसके पैरोकार चाटुकार आप जैसे पत्रकार हैं जो सारा दोष वक्त के मोहरों पर, नियति पर डाल पाठकों को कापुरुष अर्जुन सा मान बैठे है जो कुरुक्षेत्र में मोहित हो शस्त्रविहीन है? और आप ?? कर्ण सा अपने को ज्ञाता बतला रहे है संविधान निर्माताओं ने हिन्दूओं को पंख दिये, हिन्दू व्यक्ति वादी अंदाज में उड़ा, जातियाँ उड़ी, दलित उड़े, आदिवासी उड़े??? ये सब उड़े पर धर्म विहीन हो उड़े। असल में हिन्दू ही उड़ गया वो उड़ कर कभी ईसाईयत की छांव में गया तो कभी बेइस्लामि झूठ झाल में फंस गया, हिन्दू हिन्दू से ही अलग होता गया, पता ही न चला कब बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक होती गई, अस्तु।

    कैलाश माहेश्वरी
    भीलवाड़ा-राजस्थान।
    मोबाईल 9414114108

  2. हरिशंकर जी व्यास,

    लेख अच्छा है, पर आप वैचारिक तौर पर भ्रमित है और भटके हुए भी, जिसकी स्वीकारोक्ति आप लेख श्रृंखला में भी कई बार कर चुके हैं कि मैं भटक रहा हूँ। भटकाव के इसी जद्दोजहद में आप लेख श्रृंखला के अंतिम पैरा में भी प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़ देते हैं उनका हल नहीं रखते है जिन प्रश्नों के उत्तर के लिये आपने यह लेख श्रृंखला शुरू की।

    समस्या ज्ञानी स्तम्भकार वेद प्रकाश वैदिक जैसे दोगलेपन विचारों की है जो नागरिकता संशोधन कानून जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अलग अलग मंचों पर अपने विचार एक ही समय में, एक ही दिन बदलते ही नहीं है तथ्यों को छुपाकर, विपरीत रह कर लोगों में भ्रम फैलाते है व जाने अनजाने राष्ट्र निर्माण में घुन का काम करते है।

    इस्लाम पर कहने से पूर्व उसके मर्म को समझना होगा जो उसे अन्य से घृणा पर मजबूर करता है, उसके मूल को सींचने वाले मर्म को बींधना होगा, उसका समूल नाश करना होगा। पढ़िये और समझिये उन पुस्तकों को, कारकों को, जो इस घृणा का आधार बनती है और राष्ट्र निर्माण में बाधक उस घृणा को पोषित भी करती है, अस्तु।

    कैलाश माहेश्वरी
    भीलवाड़ा-राजस्थान।
    मोबाईल 9414114108.

  3. अजब गज़ब बात है !

    एक घृणा करने वाला धर्म 1400 साल में 1400 मिलियन अनुयाई बना लेता है।

    जबकि एक तथाकथित प्रेम करने वाला / सारी धरा को एक कुटुंब मानने वाला धर्म जो सृष्टि के आरंभ से अस्तित्व में है उससे पीछे रह गया ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares