कानून बनेगा या 92 दोहराया जाएगा?

अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण कैसे होगा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाएगा? केंद्र सरकार अध्यादेश या कानून लाएगी? या 1992 का इतिहास दोहराया जाएगा? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नए कल्याण सिंह बनेंगे? वैसे अगर 1992 दोहराया गया तब भी योगी आदित्यनाथ की सरकार का हस्र कल्याण सिंह वाला नहीं होगा क्योंकि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और इस समय भाजपा की सरकार है। 

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि छह नवंबर को सरयू के किनारे होने वाले दीपोत्सव से लेकर छह दिसंबर को विवादित ढांचा गिराए जाने की बरसी तक का एक महीने का समय बहुत उथलपुथल का रहने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि वे दिवाली पर खुशखबरी देंगे। माना जा रहा है कि वे सरयू किनारे भगवान राम की बड़ी मूर्ति स्थापित करने का ऐलान करेंगे। पर राम जन्मभूमि स्थल पर विराजमान राम लला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा है कि योगी राम मंदिर के निर्माण की तारीख बताएं। 

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर सुनवाई टलने के बाद भाजपा के महासचिव राम माधव ने कहा कि देश में हालात 1992 जैसे बन रहे हैं। ध्यान रहे 1992 में पूरे साल चले मंदिर आंदोलन के बाद कारसेवकों ने छह दिसंबर को विवादित ढांचा गिरा दिया था। तभी संघ के नंबर दो पदाधिकारी भैयाजी जोशी का यह कहना भी बहुत अहम है कि अगर मंदिर निर्माण में देरी हुई तो संघ 1992 जैसा आंदोलन शुरू कर सकता है। संघ और भाजपा के नेताओं का बार बार 1992 को याद करना किसी बड़े घटनाक्रम का इशारा है। 

यह भी संयोग नहीं है कि शिव सेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे नवंबर के अंत में अयोध्या जा रहे हैं, जहां शिव सैनिकों ने बड़ी रैली की योजना बनाई है। ध्यान रहे 1992 में विवादित ढांचा तोड़े जाने में कारसेवा के लिए पहुंचे शिव सैनिकों का बड़ा योगदान था और तब के शिव सेना सुप्रीमो बाल ठाकरे संभवतः इकलौते नेता थे, जिन्होंने इस बात का श्रेय लिया था कि शिव सैनिकों ने ढांचा गिराया है। तभी इस बात का अंदेशा जताया जा रहा है कि छह दिसंबर को राममंदिर की नींव रखने या निर्माण शुरू करने का प्रयास हो सकता है। 

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