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मलमास से घबरा रही है भाजपा?

यह हैरान करने वाली बात है, लेकिन सच है कि भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात में विधानसभा चुनाव 14 जनवरी के बाद कराने की अपील की है। मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोति के नेतृत्व में गुजरात के दौरे पर गई चुनाव आयोग की टीम के सामने भाजपा के प्रदेश नेताओं ने कहा कि 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक का समय हिंदू परंपरा में शुभ नहीं माना जाता है। इसे मलमास कहते हैं। इसलिए चुनाव आयोग को चाहिए कि वह 14 जनवरी के बाद चुनाव कराए।

मलमास में चुनाव नहीं कराने का पहला संकेत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिया था। उन्होंने पिछले दिनों गुजरात गौरव यात्रा में कहा था कि राज्य में विधानसभा चुनाव दिसंबर के पहले हफ्ते में होंगे। इससे यह संदेश गया था कि अमित शाह चाहते हैं कि चुनाव मलमास से पहले हो जाए। सो, चाहे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हों या प्रदेश के नेता दोनों की कोशिश मलमास में चुनाव टालने की है।  

सवाल है कि जब पहले नरेंद्र मोदी और अमित शाह दिसंबर में मलमास में चुनाव कराते और जीतते रहे हैं तो इस बार क्यों घबराहट है? पिछली बार भी दो चरणों में 19 और 21 दिसंबर को चुनाव हुए थे और 23 दिसंबर को नतीजे आए थे। उससे पहले 2007 में भी गुजरात विधानसभा के चुनाव दिसंबर में ही हुए थे। ये दोनों चुनाव 14 दिसंबर को मलमास शुरू होने के बाद हुए थे। 

असल में नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों अब गुजरात से बाहर निकल कर राष्ट्रीय नेता हो गए हैं इसलिए प्रदेश भाजपा के नेताओं का भरोसा और मनोबल दोनों कम हुआ है। यह भी कहा जा रहा है कि हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकौर और जिग्नेश मेवानी जैसे हाल में उभरे जातीय नेताओं के असर से भी प्रदेश की राजनीति बदली है और इससे कांग्रेस को आक्रामक राजनीति करने का मौका मिला है। तभी चुनाव प्रबंधन के इस बार पहले से ज्यादा बंदोबस्त किए जा रहे हैं। बहरहाल, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि चुनाव दिसंबर में ही होगा। 14 दिसंबर से पहले होगा या बाद में यह बहुत जल्दी पता चल जाएगा। 

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