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भाजपा विधायकों की अटकी सांस!

गुजरात में भाजपा के विधायकों की सांस अटकी है। जब तक टिकटों की घोषणा नहीं हो जाती है, तब तक सारे विधायक बेचैन हैं। ऊपर से सोशल मीडिया के प्रचार ने उनकी नींद और उड़ाई है। सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर भाजपा के कथित सूत्रों के हवाले से खबर चल रही है कि लगातार दो बार चुनाव जीते विधायकों को इस बार टिकट नहीं मिलेगी। ऐसे विधायकों की संख्या 50 से ज्यादा है। ध्यान रहे दिल्ली नगर निगम में इसी तरह भाजपा ने अपने सारे पार्षदों की टिकट काट दी थी और उनके परिवार के किसी सदस्य को टिकट देने से इनकार कर दिया था।

यह फार्मूला पूरी तरह से तो नहीं आजमाया जाएगा, लेकिन कहा जा रहा है कि बड़ी संख्या में विधायकों की टिकट कट रही है। टिकट तय करने के लिए भाजपा की माथापच्ची से भी यह अंदाजा लग रहा है। टिकटों के लिए पहले छह दिन तक क्षेत्रवार बैठक हुई है और उसके बाद दो दिन प्रदेश संसदीय बोर्ड की बैठक हुई है। जानकार सूत्रों के मुताबिक संभावित उम्मीदवारों की सूची बन गई है और उसे मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष लेकर दिल्ली जाएंगे, जहां केंद्रीय चुनाव समिति में उस पर विचार होगा।

पिछली बार भाजपा ने करीब 30 विधायकों की टिकट काटी थी। उससे पहले 2007 के चुनाव में मोदी ने मुख्यमंत्री रहते 47 विधायकों की टिकट काट दी थी। पर 2012 में कम विधायकों की टिकट इसलिए कटी क्योंकि यह अंदेशा था कि विधायक बागी होकर केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी में चले जाएंगे। इस बार एक दूसरे बड़े नेता शंकर सिंह वाघेला ने अलग पार्टी बनाई है, पर उनसे भाजपा को खतरा नहीं है। माना जा रहा है कि उन्होंने भाजपा की मदद करने के लिए पार्टी बनाई है।

पर भाजपा को तीन जातीय नेताओं, हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकौर की चिंता है। ये तीनों क्रमशः पटेल, दलित और ओबीसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन तीनों को कांग्रेस के एक निश्चित संख्या में सीट देगी। सो, भाजपा नेताओं को चिंता है कि वह जिन विधायकों को टिकट नहीं देगी, वे इनमें से किसी के साथ जा सकते हैं और कांग्रेस की टिकट ले सकते हैं। सो, भाजपा बहुत सोच समझ कर टिकट काटने का फैसला करेगी।

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