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जातीय समीकरणों पर भाजपा की नजर!

भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की टिकटों के जरिए जातीय समीकरण साधने का प्रयास किया है। केंद्रीय मंत्रियों और अमित शाह की टीम के पदाधिकारियों को मिली टिकट को छोड़ दें तो बाकी टिकटों के जरिए पार्टी ने अलग अलग राज्यों की जातीय समीकरण को साधा है। 

सरकार और संगठन से जुड़े नेताओं को टिकट देने में जातीय समीकरण का ध्यान नहीं रखा गया है। झारखंड में भाजपा ने समीर उरांव को टिकट दिया। हालांकि पार्टी चाहती तो किसी बड़े आदिवासी चेहरे को उतार सकती थी। फिर भी आदिवासी उम्मीदवार देकर पार्टी ने नाराज चल रहे आदिवासी समूहों को पटाने का प्रयास किया है। खास तौर से उरांव आदिवासियों को जिनके नेता और राज्य के स्पीकर दिनेश उरांव लगातार मुख्यमंत्री के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इसी तरह भाजपा ने केरल के एझवा नेता मुरलीधरन को महाराष्ट्र से राज्यसभा में भेजने की घोषणा की है। यह केरल में जातीय समीकरण साधने का प्रयास है। 

राजस्थान में भाजपा ने किरोड़ी लाल मीणा और मदन लाल सैनी को उम्मीदवार बनाया है। मीणा का अपनी जाति में बड़ा असर है और उनके सहारे पूरे मीणा वोट बैंक को मैसेज दिया गया है। सैनी माली जाति से आते हैं, जिस जाति से कांग्रेस नेता अशोक गहलोत भी आते हैं। इसके अलावा राजस्थान से सटे हरियाणा में भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने अलग पार्टी बनाने का ऐलान किया है। उनको भी इस दांव से शांत कराने का प्रयास हुआ है। 

सबसे कमाल की सोशल इंजीनियरिंग भाजपा ने उत्तर प्रदेश में की है। अनिल जैन और जीवीएल नरसिंह राव को छोड़ दें तो बाकी छह टिकट भाजपा ने जातीय समीकरण के लिहाज से दिए हैं। मायावती के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जाटव जाति की कांता कर्दम को टिकट दिया गया है तो अपने सहयोगी ओमप्रकाश राजभर को चुप कराने के लिए सकल दीप राजभर को टिकट दे दिया गया है। भाजपा वैसे तो गैर यादव पिछड़ी जातियों की राजनीति कर रही है पर उसने सपा छोड़ कर भाजपा में आए हरनाथ सिंह यादव को टिकट देकर यादव मतदाताओं को भी एक मैसेज दिया है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पार्टी ने अशोक बाजपेयी को चुना है, जो सपा के संस्थापकों में से एक रहे हैं और कुछ समय पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे।

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