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कांग्रेस को राम मंदिर की चिंता!

कांग्रेस पार्टी ने भले सुप्रीम कोर्ट में कही कपिल सिब्बल की बात से अलग कर लिया है, और कहा है कि वह चाहती है कि अयोध्या विवाद पर अदालत का फैसला जल्दी से जल्दी आए, पर हकीकत यह है कि पार्टी अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर और बाबरी मस्जिद के जमीन विवाद को लेकर चिंता में है। कांग्रेस को लग रहा है कि अगर लोकसभा चुनाव से पहले इसका फैसला आ गया और अदालत ने मंदिर बनाने की इजाजत दे दी तो पूरी राजनीति बदल जाएगी। 

कांग्रेस के एक वरिष्ठ जानकार नेता का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर भी मुहर लगा दी। यानी जमीन की बंटवारा तीन हिस्सों में कर दिया और दो हिस्से निर्मोही अखाड़ा और रामलला को मिल गई तब भी भाजपा वहां मंदिर निर्माण का काम शुरू करा देगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जमीन का तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया था। ध्यान रहे कुछ मुस्लिम नेताओं के जरिए एक प्रयास यह भी चल रहा है कि मुस्लिम संगठन और इस जमीन के दावेदार अपना दावा छोड़ दें। 

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह प्रयास तेज होगा। तभी कांग्रेस नहीं चाहती है कि लोकसभा चुनाव से पहले इसका फैसला आए। कपिल सिब्बल ने मंगलवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह अयोध्या मामले की सुनवाई अगले लोकसभा चुनाव तक के लिए टाल दे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को पांच या सात जजों की संविधान पीठ को सौंप दिया जाए। 

सिब्बल, धवन, दुष्यंत दवे आदि वकीलों ने किसी तरह से मामले की सुनवाई टलवाने का प्रयास किया। पर अदालत ने इस पर सुनवाई की तारीख अगले साल आठ फरवरी तय कर दी है। तभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिंता में हैं। हालांकि वे अब भी उम्मीद कर रहे हैं कि सिब्बल और दूसरे वरिष्ठ वकील इस मामले को ठीक तरह से हैंडल करेंगे। उनको यह भी उम्मीद है कि शायद बाद में मामला संविधान पीठ को चला जाए या सुनवाई लंबी चले और फैसला सुरक्षित हो जाए। यानी किसी तरह से कांग्रेस की कोशिश होगी कि विवादित जमीन के मालिकाना हक का फैसला लोकसभा चुनाव से पहले नहीं आए। 

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