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विवाद के सारे मुद्दे खुल गए!

पिछले तीन दशक से भारत की राजनीति विवाद के जिन आधा दर्जन मुद्दों पर चलती रही है, वे सारे मुद्दे अचानक खुल गए हैं। राजनीति के जानकार खास कर विपक्षी पार्टियों के नेता इसे संयोग नहीं मान रहे हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि किसी न किसी डिजाइन के तहत एक के बाद एक विवादित मुद्दों को खोला जा रहा है। उन्हें सीधे सरकारी आदेश के जरिए खोला जा रहा है या अदालत और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं के जरिए चर्चा में लाया जा रहा है।

शुक्रवार को ही अयोध्या मामले पर सुनवाई शुरू हुई है। तीन जजों की बेंच ने इसकी सुनवाई शुरू की है। इससे ठीक पहले शिया वक्फ बोर्ड ने एक हलफनामा देकर कहा है कि जमीन उसकी है और वह इसके बदले में दूसरी जगह जमीन लेने को तैयार है, जहां मस्जिद बना दी जाए। इससे मामला अचानक चर्चा में आ गया है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 की वैधानिकता पर भी सुनवाई कर रही है और इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। ये दोनों मुद्दे भाजपा के कोर मुद्दे हैं। तीसरा कोर मुद्दा समान नागरिक संहिता का है। उसमें से भी कुछ मुद्दों पर सुनवाई हुई है।

इस बीच कांग्रेस को 1989 में सत्ता से बेदखल करने वाला बोफोर्स का मुद्दा फिर से खुल गया है। ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रहे हैं। उसमें बोफोर्स का मुद्दा खुलना और सीबीआई का फिर से सक्रिय होना कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल का काम हो सकता है। सिख विरोधी दंगों की भी फिर से जांच शुरू हो गई है। यह भी कांग्रेस के चिंता की बात हो सकती है। एक ताजा मामला ताजमहल की पहचान को लेकर है। आरटीआई के तहत मांगी गई एक सूचना के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बताए कि यह शाहजहां का बनवाया स्मारक है या किसी राजपूत राजा का बनवाया हुआ मंदिर है, जो पहले तेजो महालया था। कई हिंदू संगठन दावा करते रहे हैं कि यह हिंदू मंदिर था। इस पर संस्कृति मंत्रालय के जवाब से इस मामले में नया मोड़ आ सकता है।

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