कैराना से पहले जाटों को भड़काने का प्रयास!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट का उपचुनाव भाजपा के लिए बहुत प्रतिष्ठा का चुनाव है। खास कर गोरखपुर और फूलपुर सीट पर उपचुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके दूसरे मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के लिए अगले लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी मौका है। तो दूसरी ओर सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद यानी समूचे विपक्ष के लिए भी यह प्रतिष्ठा का चुनाव है।  विपक्ष ने तबस्सुम बेगम को साझा उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा ने दिवंगत सांसद हुकूम सिंह की बेटी मृंगाका सिंह को उतारा है। विपक्ष को उम्मीद है कि रालोद की टिकट पर उम्मीदवार उतारने की वजह से जाट उसको वोट देंगे। मृंगाका सिंह गूजर हैं इसलिए भी विपक्ष को लग रहा है कि जाट उनके साथ नहीं जाएंगे। विपक्षी नेताओं को यह भी अंदाजा है कि मायावती की अपील पर जाटव भी रालोद उम्मीदवार को वोट करेंगे। जाट और जाटव का मुस्लिम उम्मीदवार के पक्ष में वोट करना तभी मुश्किल होगा जब सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण हो। 

सो, भाजपा की ओर उसका प्रयास शुरू हो गया है। भाजपा नेताओं को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विवाद के बहाने मौका भी मिल गया है। गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र संघ कार्यालय में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर पिछले कई दिन से विवाद चल रहा है। इस विवाद के बीच एक नया पहलू यह जुड़ गया है कि भाजपा नेता इसका नाम बदल कर राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर करने की मांग करने लगे हैं। 

गौरतलब है कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह जाट सामंत थे और उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के लिए जमीन दी थी। सो, उनके नाम पर जाटों को भड़काया जा रहा है। स्थानीय नेताओं के बाद हरियाणा के जाट नेता और राज्य सरकार के मंत्री कैप्टेन अभिमन्यु ने मांग की है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर हो। अगले दो हफ्ते में भाजपा इस मांग को और तेज करेगी ताकि जाट और मुस्लिम के बीच दूरी बढ़ाई जा सके। 

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