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कर्नाटक का मैसेज तो भाजपा के लिए भी है!

भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक जीत गई। पर कांग्रेस की हार का भाजपा के लिए भी एक बड़ा मैसेज है। कर्नाटक का चुनाव खत्म होने के बाद उन राज्यों में चुनाव होने हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी का शासन है। कर्नाटक के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि सरकार चाहे काम जैसा करती हो पर लोगों में बदलाव की चाह है। लोग बहुत एंटी इन्कंबैंसी नहीं होने के बावजूद सत्ता बदल रहे हैं। 

ध्यान रहे चुनाव से पहले जितने भी सर्वेक्षण हुए थे उनमें कहीं भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को लेकर बहुत निगेटिव माहौल देखने को नहीं मिला। लोगों के कई मामलों में उनके कामकाज को सराहा था। उनकी कई योजनाएं लोगों में हिट रही थीं। इसके अलावा राजनीतिक दांवपेंच भी उन्होंने खूब चले थे। लिंगायत को बांटने का मामला हो, पिछड़ी व दलित जातियों के साथ साथ मुस्लिम का समीकरण बनाने का मामला हो या कन्नड़ अस्मिता का दांव हो, उन्होंने बिसात बहुत अच्छी बिछाई थी। इसके बावजूद कांग्रेस हार गई। 

सो, भाजपा के लिए यह बड़ा संकेत है क्योंकि अब उसके शासन वाले राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। इक्का दुक्का अपवादों को छोड़ कर हर जगह मतदाताओं ने बदलाव को प्राथमिकता दी है। इस साल पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में चुनाव हुए और तीनों जगह सत्ता बदली। उससे पहले दो राज्यों गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव हुए। इनमें भाजपा जैसे तैसे गुजरात बचाने में कामयाब रही पर हिमाचल में सत्ता बदल गई। उससे पहले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब में चुनाव हुए थे। इन पांचों राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियां हारी थीं। ध्यान रहे भाजपा भी गोवा में हारी थी, हालांकि उसने सरकार बना ली। 

बहरहाल, इससे भी पहले 2016 में पांच राज्यों में चुनाव हुए थे, जिनमें बंगाल और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी जीती थी, पर केरल, असम और पुड्डुचेरी में सत्तारूढ़ पार्टियों की हार हुई थी। कुल मिला कर पिछले दो साल में 16 राज्यों में चुनाव हुए हैं, जिनमें से सिर्फ तीन राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टी जीत सकी थी बाकी 13 राज्यों में लोगों ने सत्ता पलट दी। सो, कहा जा सकता है कि कर्नाटक के नतीजे भाजपा की राज्य सरकारों और केंद्र की सरकार के लिए भी एक बड़ा संदेश देने वाले हैं। 

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