कांग्रेस प्रभारी चुनाव लड़ाएंगे या खुद लड़ेंगे?

भारतीय जनता पार्टी ने करीब 30 नेताओं को चुनाव प्रभारी बनाया है। इनमें से दस राज्यसभा के सांसद हैं, जिनको चुनाव नहीं लड़ना है और बाकी राज्यों के विधायक या राज्य सरकार के मंत्री हैं। इकलौते लोकसभा सांसद, जिनको प्रभारी बनाया गया है वे कलराज मिश्र हैं, जिनके बारे में चर्चा है कि वे शायद लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। राज्यों में भी भाजपा के लगभग सारे प्रभारी ऐसे हैं, जिनको लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ना है। पर इसके उलट कांग्रेस ने राज्यों में जितने प्रभारी बनाए हैं उनमें दो-तीन को छोड़ कर लगभग सबको लोकसभा का चुनाव लड़ना है। तभी कांग्रेस में यह सवाल पूछा जा रहा है कि कांग्रेस के महासचिव या प्रभारी पार्टी को चुनाव लड़वाएंगे या खुद चुनाव लड़ेंगे?

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को खुद चुनाव लड़ना है पर वे महाराष्ट्र जैसे अहम राज्य के प्रभारी हैं। उनको अपने राज्य और अपनी सीट के साथ साथ महाराष्ट्र पर भी ध्यान देना है। असम के प्रभारी हरीश रावत को भी लोकसभा का चुनाव लड़ना है। राहुल की युवा टीम के जिन नेताओं को राज्यों में प्रभारी बनाया गया है, उन सबको लोकसभा का चुनाव लड़ना है। झारखंड के प्रभारी आरपीएन सिंह, ओड़िशा के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह, गुजरात के प्रभारी राजीव सातव, पश्चिम बंगाल के प्रभारी गौरव गोगोई, कर्नाटक के प्रभारी केसी वेणुगोपाल, आंध्र प्रदेश के प्रभारी ओमन चांडी आदि को लोकसभा का चुनाव लड़ना है। कई राज्यों में तो सह प्रभारी भी ऐसे हैं, जिनको लोकसभा का चुनाव लड़ना है। सो, अगर नई नियुक्तियां नहीं हुईं तो चुनाव नजदीक आने पर कामकाज प्रभारी होगा। 

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