महाराष्ट्र में छोटी पार्टियों की चुनौती

कांग्रेस और एनसीपी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने लोकसभा की 48 में से 44 सीटों पर फैसला कर लिया है। अब सिर्फ चार सीटें बची हैं, जिनके बारे में फैसला होना है। दोनों पार्टियों के इस दावे से राज्य की ऐसी छोटी पार्टियां परेशान हुई हैं, जो कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन का हिस्सा बनना चाहती थीं या कम से कम जिनके बारे में चर्चा था कि वे भाजपा विरोधी गठबंधन का हिस्सा होंगी। एनसीपी नेता शरद पवार के 44 सीटों पर समझौते का ऐलान करने के बाद स्वाभिमानी पक्ष के राजू शेट्टी, भारिप मजदूर संघ के प्रकाश अंबेडकर और एमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी एक हुए हैं। ये तीनों राज्य की सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर सकते हैं, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस और एनसीपी को होगा। 

ध्यान रहे पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी को कुल मिला कर 34 फीसदी वोट मिले थे, जबकि भाजपा और शिव सेना को 48 फीसदी। दोनों में 14 फीसदी वोट का अंतर था। अगर कांग्रेस और एनसीपी बाकी पार्टियों को साथ नहीं लेंगे तो भाजपा और शिव सेना का मुकाबला भारी पड़ेगा। तभी कहा जा रहा है कि कांग्रेस और एनसीपी समझौता होने के बावजूद छह से आठ सीटें छोड़ेंगे। उनको ओवैसी की पार्टी से तालमेल नहीं करना है पर राजू शेट्टी और प्रकाश अंबेडकर को साथ रखना है। तभी किसान आंदोलन और दलितों की नाराजगी का पूरा फायदा गठबंधन को हो पाएगा। बहुजन समाज पार्टी क्या कदम उठाती है, इस पर भी सबकी नजर है।

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