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पासवान के भरोसे दलित वोट!

गुजरात में क्या भाजपा के पास कोई दलित चेहरा नहीं है? रामविलास पासवान के प्रचार में जाने और दलित मुद्दों पर बयान देने के बाद यह सवाल उठा है। प्रदेश में अच्छी खासी दलित आबादी है, इसलिए नेता भी हैं, लेकिन ऐसा लग रहा है कि भाजपा उनकी बजाय रामविलास पासवान की लोकप्रिय छवि का इस्तेमाल करना चाहती है। उसे दलित वोट के लिए पासवान के ऊपर ज्यादा भरोसा है।  भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि राज्य में दलित आंदोलन का उभार लाने वाले जिग्नेश मेवानी के कांग्रेस का साथ देने की वजह से भाजपा के सामने कोई बड़ा चेहरा पेश करने की चुनौती हो गई।

असल में कुछ समय पहले गुजरात के उना में तीन दलितों के साथ मारपीट हुई और उसका वीडियो देश भर में वायरल हुआ। उस समय मेवानी ने यह मुद्दा उठाया और दलितों के लोकप्रिय नेता हो गए।  रामविलास पासवान पिछले दिनों प्रचार के लिए गुजरात गए तो उनके सामने उना की घटना का जिक्र हुआ तो उन्होंने इसे छोटी मोटी घटना करार देकर खारिज किया। एक तरह से उन्होंने मेवानी को छोटा मोटा नेता बताया। उन्होंने दलितों से बहकावे में नहीं आने और भाजपा को वोट देने की अपील की। बहरहाल, चर्चा है कि वे आगे भी प्रचार के लिए जाएंगे और भाजपा की ओर दलित चेहरे के तौर पर पेश होंगे। भाजपा के अपने दलित नेता और केंद्रीय मंत्री भी प्रचार में जाएंगे, पर चूंकि उनका वैसा ग्लैमर नहीं है, जैसा पासवान का है तो वे हाशिए में ही रहेंगे।

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