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सुप्रीम कोर्ट का विवाद कौन सुलझाएगा?

देश की सर्वोच्च अदालत का विवाद, जो पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ है वह फिर तेज हो गया है। चीफ जस्टिस के कामकाज की शैली और मुकदमों के आवंटन को लेकर आपत्ति करने वाले चार सबसे वरिष्ठ जजों में से दो जजों ने अपनी नाराजगी का खुल कर इजहार किया है। उनकी नाराजगी अब भी चीफ जस्टिस के कामकाज को लेकर है और न्यायपालिका के कामकाज में सरकार के दखल को लेकर है।
अगले दो महीने में रिटायर हो रहे दूसरे सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलमेश्वर की नाराजगी ध्यान देने लायक है। उन्होंने चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर होने के नाते मुकदमों के आवंटन के अधिकार को चुनौती देने वाली शांति भूषण की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि उनका आदेश 24 घंटे के अंदर पलटा जाए। उन्होंने इसके बाद बहुत तकलीफ के साथ यह कहा कि उनके बारे में यह प्रचार किया जा रहा है कि वे कुछ बड़ी चीज हासिल करना चाहते थे। वे चीफ जस्टिस नहीं बन पाए और उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वे रिटायर होने के बाद कोई पद नहीं लेंगे। इसलिए जब यह प्रचार किया जाता है कि वे कोई पद लेने के लिए विवाद खड़े कर रहे हैं तो तकलीफ स्वाभाविक है। इस तरह के प्रचार न्यायपालिका की निष्पक्षता व स्वतंत्रता के लिए घातक हैं। 
कॉलेजियम के एक दूसरे सदस्य जस्टिस कुरियर जोसेफ ने सरकार के दखल पर सवाल उठाया है। गौरतलब है कि कॉलेजियम ने दो लोगों को सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्त करने की सिफारिश की है, जिस पर पिछले तीन महीने से सरकार ने फैसला नहीं किया है। कॉलेजियम के सिफारिशों पर चुनिंदा तरीके से मंजूरी देने के सुप्रीम कोर्ट के रवैए को जस्टिस जोसेफ अच्छा नहीं मानते हैं। वे चाहते हैं कि चीफ जस्टिस और पूरी न्यायपालिका अपने को बचाने के लिए इसका जवाब दे। 
पर चीफ जस्टिस की ओर से इस बारे में चुप्पी साधी गई है। इससे माना जा रहा है कि चीफ जस्टिस बनाम चार वरिष्ठ जजों का विवाद अभी चल रहा है। उस समय बार कौंसिल ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जजों का विवाद सुलझाने की पहल की थी। पर अब किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि जजों का आपसी विवाद और न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका का विवाद कौन सुलझाएगा। 

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