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बिहार के मंत्री का अनोखा रिकॉर्ड

बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। वे दो बार मंत्री बने और दोनों बार किसी सदन के सदस्य नहीं बन सके। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नवंबर 2025 में एनडीए की सरकार के गठन के समय राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने सबको चौंकाते हुए अपने बेटे को मंत्री बनवा दिया था। उनकी पार्टी के चार विधायक जीते थे, जिनमें एक उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी थीं। माना जा रहा था कि वे उनको मंत्री बनवाएंगे लेकिन उन्होंने अपने बेटे को मंत्री बनवाया, जो उस समय किसी सदन के सदस्य नहीं थे। तब कहा गया था कि मंगल पांडेय विधानसभा का चुनाव जीत गए हैं तो वे विधान परिषद की सीट खाली करेंगे और उस सीट पर दीपक प्रकाश को भेजा जाएगा। हालांकि भाजपा ने अपने कोटे की यह सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए नहीं छोड़ी।

दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री बने रहे इस बीच राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया और उनकी जगह सम्राट चौधरी मंत्री बने। नीतीश ने 14 अप्रैल को इस्तीफा दिया। उसी दिन उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का इस्तीफा हो गया। इस तरह दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य रहे 20 नवंबर से 14 अप्रैल तक यानी करीब पांच महीने तक मंत्री रहे। इस बीच भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेज दिया। तब कहा गया कि अब दीपक प्रकाश मंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन सात मई को जब सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो फिर दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया गया। इस बार कहा गया कि विधानसभा सदस्यों द्वारा नौ विधान पार्षद चुने जाने हैं उनमें से एक सीट दीपक प्रकाश को मिलेगी। लेकिन उन नौ उम्मीदवारों में दीपक प्रकाश को जगह नहीं मिली। हालांकि अब भी वे सात नवंबर तक मंत्री रह सकते हैं। लेकिन उस समय तक कोई वैकेंसी नहीं आने वाली है इसलिए उनको इस्तीफा देना होगा। उनके अनोखे रिकॉर्ड का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा है।

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