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राज्यसभा चुनाव में जीतू पटवारी की परीक्षा

New Delhi, Jun 28 (ANI): Congress leader Jitu Patwari addresses a party briefing, at Indira Bhavan in New Delhi on Saturday. (ANI Photo/Jitender Gupta)

मध्य प्रदेश में भाजपा ने राज्यसभा का चुनाव उलझा दिया है। हालांकि यह कोई नई बात नहीं है। भाजपा पिछले काफी समय से इस तरह के काम कर रही है। वह जान बूझकर राज्यसभा के चुनाव में खरीद फरोख्त को बढ़ावा देती है। उसने राजनीतिक भ्रष्टाचार को सांस्थायिक रूप से स्थापित किया है। मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव इसकी एक मिसाल है। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हैं और एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है। कांग्रेस के पास अभी 62 विधायकों का समर्थन है। खाली हो रही सीटों में से भी एक सीट उसी की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं।

उनकी सीट पर कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया। कायदे से इस सीट पर कोई मुकाबला नहीं होना चाहिए था क्योंकि कांग्रेस के पास सीट जीतने के लिए जरूरी वोट से चार वोट ज्यादा हैं। दूसरी ओर दो सीटें जीतने के बाद भाजपा के पास 48 वोट बचते हैं यानी उसे कम से कम 10 अतिरिक्त वोट की जरुरत है। ध्यान रहे मध्य प्रदेश में कोई प्रादेशिक पार्टी नहीं है और न निर्दलीय विधायक हैं। इसका अर्थ है कि भाजपा को 10 विधायक कांग्रेस से ही तोड़ने होंगे। सबको पता है कि विधायक तोड़ने का क्या तरीका है। लेकिन ईमानदारी और शुचिता की राजनीति करने वाली और न खाऊंगा, न खाने दूंगा का नारा देने वाली पार्टी खिला पिला कर कांग्रेस के 10 विधायक तोड़ने की तैयारी में है।

तभी यह चुनाव कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए बड़ी परीक्षा की तरह है। उनके कांग्रेस के दिग्गज नेताओं दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की छाया से पूरी तरह बाहर निकलने का चुनाव है। अगर वे विधायक एकजुट रखने में कामयाब हो जाते हैं और मीनाक्षी नटराजन को जिता देते हैं तो आलाकमान की नजर में उनका कद बहुत ऊंचा हो जाएगा और वे 2028 के विधानसभा चुनाव में अपने आप कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा बदलेंगे।

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