प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कम ही अधिकारियों पर भरोसा बनता है और जिन बनता है वे लंबे समय तक सेवा देते रहते हैं। तभी ज्यादातर शीर्ष अधिकारी सेवा विस्तार पर चल रहे हैं। कह सकते हैं कि सेवा विस्तार, जो पहले अपवाद के तौर पर होता था उसे इस सरकार ने एकदम सामान्य बना दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी के निदेशक को सेवा विस्तार देने के लिए तो सरकार ने कानून में संशोधन किया और यह प्रावधान किया कि पांच साल तक सेवा विस्तार दिया जा सकता है। इस समय भी सीबीआई और ईडी दोनों के प्रमुख सेवा विस्तार पर ही हैं। बहरहाल, यह संभवतः पहली बार हो रहा है कि भारत सरकार के लगभग सारे शीर्ष सचिव सेवा विस्तार पर चल रहे हैं। गृह से लेकर विदेश और रक्षा से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक सचिव सेवा विस्तार पर ही काम कर रहे हैं। सेवा विस्तार मिलने का असर यह होता है कि पीछे कई बैच के अधिकारी बिना शीर्ष पद पर पहुंचे ही रिटायर हो जाते हैं।
सबसे ताजा मामला रक्षा सचिव का है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली नियुक्ति संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति यानी एसीसी ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया है। वे 31 अक्टूबर को रिटायर होने वाले थे। वे अब 31 अक्टूबर 2027 तक सेवा देंगे। वे एक नवंबर 2024 को रक्षा सचिव नियुक्त हुए थे और दो साल का तय कार्यकाल पूरा कर लिया है। इसी तरह गृह सचिव गोविंद मोहन को दो सेवा विस्तार मिल चुका है। पहले सेवा विस्तार उनको जुलाई 2025 में मिला था और दूसरा अगस्त 2026 में। अब वे अगस्त 2027 तक पद पर रहेंगे। उनका कार्यकाल 2025 में पूरा हुआ था। विदेश सचिव विक्रम मिसरी का कार्यकाल भी जुलाई 2026 में खत्म हो रहा था। लेकिन उनको एक साल का सेवा विस्तार मिला है। वे जुलाई 2027 तक पद पर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा तो 2008 में ही सेवा पूरी करके रिटायर हो गए थे। उनकी उम्र 78 साल है।
