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केजरीवाल को स्थायी जमानत या अंतरिम?

यह लाख टके का सवाल है क्योंकि फिर चुनाव आ गया है। लोकसभा चुनाव के समय सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 21 दिन की अंतरिम जमानत दी थी ताकि वे अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर सकें। यह अपनी तरह का पहला फैसला था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस फैसले को अपवाद की तरह रखा और केजरीवाल की तरह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल से बाहर आकर प्रचार की इजाजत नहीं दी।

यह अलग बात है कि दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजीर बना दिया और आतंकवादियों की मदद करने के आरोप में जेल में बंद इंजीनियर राशिद को चुनाव प्रचार के लिए 21 दिन की अंतरिम जमानत दे दी। सोचें, इससे पहले राशिद को संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए जमानत नहीं मिली थी लेकिन जम्मू कश्मीर में प्रचार के लिए जमानत मिल गई है।

इसी आधार पर कहा जा रहा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी हरियाणा में चुनाव लड़ रही है और वे जेल में बंद हैं तो उनको भी जमानत मिलनी चाहिए। दूसरी ओर दिल्ली की शराब नीति में हुए कथित घोटाले में गिरफ्तार लगभग सारे लोगों को जमानत मिल गई। अब कोई इक्का दुक्का जेल में बंद हो तो नहीं कहा जा सकता है।

लेकिन पिछले तीन दिन में समीर महेंद्रू और अरुण पिल्लै व एक अन्य कारोबारी को भी जमानत मिल गई। इससे पहले मनीष सिसोदिया और के कविता भी जेल से छूट गए। सो, अब ले देकर एक अरविंद केजरीवाल इस मामले में जेल में बंद हैं। उनको भी ईडी के धन शोधन के केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। अब सीबीआई के मामले में जमानत का इंतजार है। तो क्या पता उनको स्थायी जमानत मिल जाए।

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