छात्रों और युवाओं के जंतर मंतर पर प्रदर्शन का क्या राजनीतिक असर हुआ है इसके आकलन का पैमाना बिहार और मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर होने वाला उपचुनाव है। गुजरात की मांजलपुर सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। लेकिन वहां भाजपा जीत जाएगी। लेकिन बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर घमासान मुकाबला है। अगर भाजपा इन सीटों पर चुनाव जीत जाती है तो उसे एक बूस्टर डोज मिल जाएगा और माना जाएगा कि जंतर मंतर पर हुए आंदोलन की नाराजगी सरकार के शिक्षा सुधार के प्रयासों के कारण खत्म हो गई है। अगर भाजपा इन दोनों सीटों पर हारती है तो यह उसके लिए खतरे की घंटी होगी।
दतिया सीट पर भाजपा ने छह बार के विधायक और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की टिकट काट कर आरएसएस की पृष्ठभूमि से आने वाले आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है। टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा जैसे भावुक हुए और उनके समर्थको ने जैसा प्रदर्शन किया। उससे कांग्रेस के प्रत्याशी घनश्याम सिंह को उम्मीद है कि भाजपा के अंदर भितरघात हो सकती है और उनको फायदा हो सकता है।
ऐसे ही बिहार की बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई है, जहां से जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर चुनाव लड़ रहे हैं। देश के सर्वाधिक सफल चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव की अच्छी रणनीति बनाई है। मुकाबला उनके और नितिन नबीन के बीच दिख रहा है। भाजपा के उम्मीदवार को लेकर अच्छी खासी नाराजगी है। पार्टी ने किसी स्थापित नेता को टिकट देने की बजाय एक सामान्य कार्यकर्ता को टिकट दिया। सामाजिक समीकरण निश्चित रूप से भाजपा के पक्ष में है। लेकिन उपचुनाव में समीकरण वैसे काम नहीं करते हैं, जैसे आम चुनाव में करते हैं। इसलिए सरकार की चिंता बढ़ी है।
