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तेजस्वी की लोकप्रियता का लाभ क्या पार्टी को मिलेगा?

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले हुए ओपिनियन पोल में सबसे ज्यादा लोगों ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद बताया। राज्य के 41 फीसदी लोगों ने कहा कि वे तेजस्वी का मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। इसके बाद सिर्फ 18 फीसदी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया। हैरानी की बात है कि 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। इस सर्वे के बाद यह बहस शुरू हो गई है कि क्या मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय होने से तेजस्वी यादव की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल जाएगा और क्या 15 फीसदी लोगों की पसंद होने से प्रशांत किशोर की पार्टी को 15 फीसदी तक वोट मिल सकते हैं?

असलियत यह है कि मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा लोगों की पसंद होने के बावजूद तेजस्वी की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल अब भी सरकार बनाने के लिए सबसे ज्यादा लोगों की पसंद नहीं है। जानकार सूत्रों के मुताबिक राजद के अपने आकलन में भी और भाजपा व जदयू की ओर से कराए गए सर्वेक्षणों में भी राजद कड़ी टक्कर देती दिख रही है लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से दूर है। इसका कारण यह है कि राजद की सरकार को लेकर अब भी लोगों के मन में आशंका है तो उसके स्थानीय नेताओं के प्रति लोगों का रूझान नहीं है। दूसरे, नीतीश कुमार की सेहत की खबरों के कारण उनकी लोकप्रियता गिरी है लेकिन अब भी ज्यादातर लोग जनता दल यू, भाजपा के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए सबसे उपयुक्त मान रहे हैं। इसी तरह प्रशांत किशोर की लोकप्रियता का पूरा लाभ उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को नहीं मिलेगा।

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