केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई देश की प्रीमियर जांच एजेंसी है लेकिन ऐसा लग रहा है कि किसी को इस पर भरोसा नहीं होता है। जो भी पार्टी विपक्ष में रहती है वह इसके दुरुपयोग के आरोप लगाती है तो अदालतें अक्सर इसकी जांच पर सवाल उठाती रहती हैं। जब कांग्रेस सरकार में थी तो भाजपा की ओर से सीबीआई को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कहा जाता था। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय इसे पिंजरे में बंद तोता कहा था। भाजपा की सरकार आने के बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है। हालांकि अब केंद्र सरकार सीबीआई से ज्यादा ईडी की जांच पर भरोसा कर रही है। विपक्षी पार्टियों के नेता ईडी की जांच से ज्यादा परेशान हैं।
सीबीआई की साख का सवाल एक बार फिर इसलिए उठ रहा है क्योंकि एक हफ्ते के अंदर दो अदालतों ने अलग अलग फैसलों में इस एजेंसी को फटकार लगाई। दिल्ली में शराब नीति घोटाले में तो विशेष अदालत ने यहां तक कहा कि एजेंसी ने सबूत गढ़ने और आरोपियों को फंसाने का प्रयास किया। इसके लिए जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए थे, जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसके बाद पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम को बरी करते हुए सीबीआई की जांच पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने गवाह के मामले में बहुत गड़बड़ी की है। अगर इसी तरह से चलता रहा तो जो भी थोड़ी बहुत जांच सीबीआई के पास जा रही है वह भी नहीं जाएगी। लोग सीबीआई जांच की मांग करना भी बंद कर देंगे।
