भारतीय जनता पार्टी की सरकारों के लिए कई बड़ी समस्याओं का समाधान यह है कि नाम बदल दिया जाए। बिहार में शिक्षा की व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है तो राज्य सरकार स्कूलों के नाम बदल रही है। साढ़े पांच सौ स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया जाएगा और उनका नाम सरस्वती विद्या निकेतन होगा। इनको भगवा रंग से रंगा जाएगा। पूरे प्रदेश में इसका विरोध हो रहा है। इस बीच राजधानी दिल्ली में सरकार ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी यानी सीपीए का नाम बदल कर दिल्ली स्टेट हेल्थ कॉरपोरेशन यानी डीएसएचसी करने जा रही है। इसका प्रस्ताव उप राज्यपाल के पास भेजा गया है और कहा जा रहा है कि जल्दी ही नाम बदल जाएगा।
सोचें, सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी यानी सीपीए में सात सौ करोड रुपए का घोटाला पकड़ा गया है। दवाओं से लेकर मेडिकल उपकरणों की खरीद में भारी घोटाला हुआ है। कई आईएस अधिकारी जांच के दायरे में हैं और कई लोगों को निलंबित किया गया है। इसके बावजूद जानकार सूत्रों का कहना है कि इसमें गड़बड़ी पर से पूरा परदा नहीं हटा है। कोई राजनीतिक व्यक्ति इसकी जांच के दायरे में नहीं आया है। इस बीच सरकार ने इस एजेंसी का नाम बदलने का फैसला कर लिया। क्या सरकार सोच रही है कि सीपीए का नाम बदल कर डीएसएचसी कर देंगे तो घोटाला नहीं होगा? या सरकार की मंशा यह है कि सीपीए का नाम बहुत बदनाम हो गया तो उसका नाम बदल देते हैं, जिससे लोगों का ध्यान हट जाएगा? जो हो भाजपा की सरकारें ऐसे ही उपायों से समस्याएं सुलझा रही हैं।
