तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की टीम वैसी ही है, जैसे चुनाव जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल ने बनाई थी या बहुत पहले असम में प्रफुल्ल कुमार महंत ने बनाई थी। केजरीवाल ने ज्यादातर नए लोगों को टिकट दी थी और चुनाव जीतने वाले ज्यादातर लोग पहली बार जीते थे। विजय के साथ भी ऐसा ही है। विजय की पार्टी टीवीके की टिकट पर चुनाव जीते 107 लोगों में से 93 लोग ऐसे हैं, जो पहली बार विधायक बने हैं। उनके विधायक दल की औसत उम्र 45 साल है। तभी जब विजय ने सरकार बनाने के लिए मंत्रियों का चयन किया तो उसमें भी बिल्कुल नए लोगों की ही जगह मिली।
केए सेंगोट्टैयन ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो पहले मंत्री रहे हैं। वे 1996 में जयललिता की सरकार में पहली बार मंत्री बने थे। वे आठ बार से विधायक हैं। लेकिन बाकी सारे चेहरे नए हैं। आधव अर्जुन हों या एस कीर्तना हों, निर्मल कुमार हों या केजी अरुण राज और एन आनंद हों, सब नए लोग हैं। एक चुनाव प्रबंधक हैं तो एक स्पोर्ट्स से जुड़े व्यक्ति हैं तो एक भारतीय राजस्व सेवा से वीआरएस लेकर राजनीति में उतरे हैं। विजय की टीम में इन्फ्लूयएंसर हैं तो चुनाव स्ट्रेटेजिस्ट हैं। खास बात यह है कि सब विजय के प्रति निष्ठावान हैं। तमिल फिल्मों में नायक के मुख्यमंत्री बनने और ऐसे प्रतिबद्ध लोगों की टीम बना कर जनता का भला करने की अनेक कहानियां हैं। देखना है कि विजय उन कहानियों को कितना साकार कर पाते हैं।
