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खाड़ी संकट से केरल में कांग्रेस का नुकसान

पश्चिम एशिया में चल रही जंग ने केरल में कांग्रेस पार्टी का नुकसान किया है।  हालांकि ऐसा नहीं है कि इस नुकसान की वजह से कांग्रेस पार्टी चुनाव हार ही जाएगी। लेकिन प्रचार समाप्त होने से पहले जो ओपिनियन पोल आए हैं उनमें अगर कांटे की टक्कर दिखाई गई है या कांग्रेस को बहुत आराम से चुनाव जीतते नहीं दिखाया गया है तो इसके कई कारणों में एक कारण पश्चिम एशिया में चल रही जंग भी है। एक बड़ा कारण तो अंदरुनी खींचतान और नेतृत्व तय नहीं होना है। कांग्रेस में आधा दर्जन मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं और सब अपने हिसाब से राजनीति कर रहे हैं। इसका मैसेज मतदाताओं के बीच अच्छा नहीं गया है। हैरानी की बात है कि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल केरल के हैं, प्रियंका गांधी वाड्रा केरल की वायनाड सीट से सांसद हैं और राहुल गांधी भी वायनाड से सांसद रह चुके हें। फिर भी पार्टी इतनी बिखरी हुई है।

बहरहाल, पश्चिम एशिया के संकट का कांग्रेस को बड़ा नुकसान इसलिए हो रहा है क्योंकि संकट के समय मतदाता मजबूत नेता की ओर देखते हैं, जो कांग्रेस में नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर सीपीएम की ओर से मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन का नेतृत्व स्पष्ट दिख रहा है। उनको बहुत मजबूत नेता के तौर पर देखा जाता है। वे 10 साल से मुख्यमंत्री हैं और उनके पक्ष में सबसे बड़ी बात यह जाती है कि कोरोना महामारी के समय उनकी सरकार ने बहुत बेहतर ढंग से प्रबंधन किया था। कोरोना का पहला केस केरल में मिला था और सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में केरल भी एक था। लेकिन केरल की सरकार ने बिल्कुल पैनिक नहीं होने दिया। ऑक्सीजन और बेड की उपलब्धता का मामला हो या दवाओं की उपलब्धता का, केरल ने बाकी राज्यों के मुकाबले बहुत अच्छा प्रबंधन किया। पश्चिम एशिया में जंग की वजह से भी जो संकट खड़ा हुआ है उसमें केरल के लोग एक मजबूत नेता की तौर पर उनकी ओर देख रहे हैं। ध्यान रहे केरल के लगभग 35 लाख लोग खाड़ी देशों में रहते हैं।

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