बिहार के अलावा ओडिशा में भी राज्यसभा के लिए चुनाव होगा। ओडिशा में चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। विधानसभा की गणित के मुताबिक राज्य में खाली हो रही चार सीटों में से दो सीटें सीधे तौर पर भाजपा जीत रही है और एक सीट बीजू जनता दल के खाते में जा रही है। तभी भाजपा ने दो उम्मीदवार दिए। लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस ने ऐलान किया कि अगर कोई तटस्थ या लोकप्रिय अराजनीतिक उम्मीदवार आता है तो कांग्रेस के 14 विधायकों का समर्थन उसको दिया जाएगा। इसके बाद बीजू जनता दल के सुप्रीमो नवीन पटनायक ने एक प्रतिष्ठित डॉक्टर दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बना दिया। कांग्रेस ने उनको समर्थन देने का भी ऐलान कर दिया। परंतु पूर्व सांसद, मंत्री व बड़े कारोबारी दिलीप रे ने निर्दलीय नामांकन कर दिया है। उनको भाजपा का समर्थन है। इससे चौथी सीट फंस गई है।
ओडिशा में एक सीट जीतने के लए 30 वोट की जरुरत है। बीजद के 48 और कांग्रेस के 14 मिला कर 62 वोट बनते हैं। इस लिहाज से उनके दोनों उम्मीदवारों की जीत पक्की है। दूसरी ओऱ भाजपा के पास 82 विधायक हैं, जिनमें से दो सीटें जीतने के बाद 12 वोट बचते हैं। वह वोट अगर दिलीप रे को ट्रांसफर हो जाता है तब भी उन्हें कम से कम आठ वोटों का इंतजाम करना होगा। कांग्रेस और दिलीप रे दोनों बीजद और कांग्रेस में सेंध लगा कर क्रॉस वोटिंग कराना चाहते हैं। य़ह भाजपा की योजना का हिस्सा है, जिसने पहले इस तरह से कई राज्यों में निर्दलीय जिताए हैं। अब नवीन पटनायक और भक्त चरण दास दोनों के लिए यह परीक्षा की घडी है। दूसरी ओर भाजपा के प्रबंधकों की साख भी दांव पर लगी है।
