यह आरोप केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लगाया है। उन्होंने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कहा कि 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के खिलाफ जो प्रदर्शन हुआ था वह प्रायोजित था। वे इतने पर नहीं रूके उन्होंने बहुत जोर देकर कहा है कि पैसे देकर यह प्रोटेस्ट कराया गया था। उनके समर्थन में कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि अगर प्रोटेस्ट प्रायोजित नहीं था तो अचानक कैसे थम गया? उनका सवाल है कि क्या अब इंजन की सारी समस्याएं खत्म हो गईं? लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि प्रोटेस्ट क्यों अचानक हुआ और अचानक थम गया। असली सवाल यह है कि प्रोटेस्ट के पीछे कौन था?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और केंद्र सरकार क्या यह पता नहीं लगा सकते हैं कि यह प्रोटेस्ट किसने प्रायोजित किया था और किसने, किसको पैसे दिए थे? जब यह पता चल गया है कि प्रायोजित रूप यह प्रदर्शन कराया गया तो यह पता लगाने में क्या समस्या है कि किसने प्रायोजित किया था? इस प्रोटेस्ट का चेहरा अरविंद केजरीवाल थे। क्या उनको किसी ने पैसा दिया था? यह मोटे तौर पर मध्य वर्ग और भाजपा समर्थकों का प्रोटेस्ट था। प्रोटेस्ट के समय यह भी खबर आई थी कि गडकरी को बदनाम करने और उनके परिवार के इथेनॉल के बिजनेस को विवादों में घसीटने के लिए यह प्रोटेस्ट हो रहा है। तो क्या उसके पीछे कोई अंदरूनी राजनीति थी? नितिन गडकरी सक्षम मंत्री हैं। उनको निश्चित रूप से यह पता लगाना चाहिए कि किसने प्रोटेस्ट प्रायोजित किया था। अगर वे जानते हैं तो सार्वजनिक भी करना चाहिए।
