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आदिवासी वोट के लिए मोदी की मेहनत

ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों के चुनाव प्रचार का एक कार्यक्रम झारखंड में भी कर रहे हैं। इस साल झारखंड दिवस यानी 15 नंवबर को वे जनजातीय गौरव दिवस झारखंड में मना रहे हैं। ध्यान रहे महान स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को होती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री खूंटी स्थित उनके गांव उलिहातू जा रहे हैं। वे देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो बिरसा मुंडा के जन्मस्थल पर जा रहे हैं। कुछ समय पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी उनके गांव गई थीं। पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में से समय निकाल कर प्रधानमंत्री 16 घंटे झारखंड में बिता रहे हैं तो यह मामूली बात नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान 24 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं की शुरुआत भी करेंगे। साथ ही केंद्र सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा आम लोगों तक पहुंचाने के लिए होने वाली विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत भी वहीं से हो रही है। सो, कुल मिला कर प्रधानमंत्री मोदी ने झारखंड पर फोकस बना दिया है। मिजोरम के बाद बचे हुए चार राज्यों में और उसके आगे लोकसभ चुनाव में आदिवासी वोट एक बार फिर से भाजपा की ओर मोड़ने की रणनीति के तहत प्रधानमंत्री यह मेहनत कर रहे हैं। ध्यान रहे आदिवासी वोट एक समय भाजपा का कोर वोट माना जाता था लेकिन पिछले कुछ समय से यह वोट धीरे धीरे खिसक रहा है।

अभी जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं उन सभी राज्यों में आदिवासी वोट बड़ी संख्या में हैं। छत्तीसगढ़ में तो आदिवासी आबादी 31 फीसदी यानी लगभग एक तिहाई है। इसी तरह मध्य प्रदेश में भी अनुसूचित जनजाति की आबादी 21 फीसदी से ज्यादा है। राजस्थान में आदिवासी आबादी 14 फीसदी के करीब है और तेलंगाना में 10 फीसदी के करीब। इन चारों राज्यों में चुनाव नतीजों को प्रभावित करने में आदिवासी मतदाताओं की बड़ी भूमिका होती है। पिछले कई राज्यों के चुनावों में गुजरात एकमात्र राज्य है, जहां भाजपा को आदिवासी मतदाताओं का समर्थन मिला है।

उसके अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के पिछले चुनाव से लेकर झारखंड और इस साल कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ। कर्नाटक में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 15 सीटों में भाजपा सिर्फ एक सीट जीत पाई और झारखंड में भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 27 सीटों में से भाजपा सिर्फ दो सीट जीत पाई। उसके बाद से ही भाजपा आदिवासी वोट वापस हासिल करने के लिए मेहनत कर रही है। इसी रणनीति के तहत बाबूलाल मरांडी की पार्टी में वापसी कराई गई और उनको अहम जिम्मेदारी देकर प्रदेश में भाजपा का चेहरा बनाया गया। बिरसा मुंडा के गांव जाकर प्रधानमंत्री मोदी देश भर के आदिवासी समुदायों को एक मैसेज दे रहे हैं। भाजपा की इस राजनीति की पहली परीक्षा छत्तीसगढ़ में होनी है। वहां चुनाव से पहले तक लग रहा था कि भाजपा मुख्य मुकाबले में नहीं है लेकिन पहले चरण के मतदान के बाद मुकाबला नजदीकी बताया जा रहा है।

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